स्थानीय युवकों ने शुरू किया रेस्क्यू, NDRF-SDRF की टीमें तैनात
हादसा होते ही आसपास के स्थानीय युवकों ने हिम्मत दिखाई और अपनी जान की परवाह किए बिना मलबे में दबे लोगों को निकालना शुरू किया. इसके तुरंत बाद फायर ब्रिगेड, स्थानीय पुलिस, भिवंडी महानगरपालिका, आपदा प्रबंधन की टीमों के साथ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टुकड़ियां भी मौके पर पहुंच गईं. राहतकर्मी लगातार मलबा हटाकर फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की हर संभव कोशिश में जुटे हुए हैं.
संकरी गलियों ने बढ़ाई मुश्किलें, चॉल तोड़कर बनाया गया रास्ता
बचाव अभियान के दौरान प्रशासनिक टीमों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. इमारत तक पहुंचने वाला रास्ता बेहद संकरा था, जिसकी वजह से शुरुआत में पोकलेन और जेसीबी जैसी भारी मशीनें घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकीं. रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज करने के लिए प्रशासन ने रास्ते में आ रही एक पुरानी चॉल को जेसीबी से गिराया. इसके बाद ही भारी मशीनें मौके पर पहुंच पाईं और मलबा हटाने का काम तेजी से शुरू हो सका.
खतरनाक घोषित थी इमारत, पिलर की मरम्मत के दौरान गिरी छत
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कोहिनूर अपार्टमेंट को महानगरपालिका ने पहले ही जर्जर और बेहद खतरनाक घोषित करके नोटिस जारी किया हुआ था. दो विंग वाली इस इमारत के निर्माण पर शुरुआत से ही सवाल उठ रहे थे. बताया जा रहा है कि ग्राउंड फ्लोर के पिलर काफी कमजोर हो चुके थे और हादसे के समय उन्हीं पिलरों की मरम्मत का काम चल रहा था. पिलर पर अचानक दबाव बढ़ने की वजह से पूरी इमारत पल भर में गिर गई.
खाली कराने के दौरान हुआ हादसा, सामान निकालने अंदर गए थे लोग
घटना की बात करें तो गुरुवार शाम करीब 6 बजे इमारत में बड़ी-बड़ी दरारें दिखनी शुरू हुई थीं. रात लगभग 8 बजे जब इमारत एक तरफ झुकने लगी, तो सहायक आयुक्त अरविंद घोगरे अपनी टीम के साथ पहुंचे और लोगों को तुरंत बाहर निकालना शुरू किया. ज्यादातर परिवारों को बाहर निकाल लिया गया था, लेकिन कुछ लोग अपना जरूरी सामान निकालने के लिए दोबारा अंदर चले गए. इसी बीच पिलर की मरम्मत के दौरान इमारत अचानक पूरी तरह ढह गई.
बेटी खुद मलबे से बाहर निकली - प्रत्यक्षदर्शी का खौफनाक अनुभव
हादसे में बाल-बाल बचे प्रत्यक्षदर्शी अरविंद गुप्ता ने बताया कि वे और उनकी पत्नी समय रहते बाहर निकल आए थे, लेकिन उनकी बेटी कोमल मलबे के नीचे फंस गई थी. कोमल ने हिम्मत नहीं हारी और खुद ही मलबे के बीच से रास्ता बनाकर सुरक्षित बाहर निकल आई. कोमल ने बताया कि जब इमारत के निचले हिस्से में पिलरों की मरम्मत का काम चल रहा था, तभी अचानक पूरी बिल्डिंग ढह गई.
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का क्या है कहना इस पर मामले में ?
घटनास्थल पर पहुंचे स्थानीय विधायक महेश चौघुले ने बताया कि अभी भी मलबे के नीचे 5 से 6 लोगों के दबे होने की आशंका है और सभी एजेंसियां मिलकर बचाव काम में लगी हुई हैं. वहीं भिवंडी के महापौर नारायण चौधरी ने साफ किया कि इमारत को पहले ही नोटिस दिया जा चुका था. उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे जर्जर और खतरनाक घोषित इमारतों में अपनी जान जोखिम में डालकर न रहें. प्रशासन ने बेघर हुए लोगों के रहने का इंतजाम पास के स्कूलों और सामुदायिक भवनों में किया है. फिलहाल राहत कार्य जारी है और पुलिस मामले की जांच कर रही है.