Sujit Sinha Pakistan Connection: जामताड़ा पुलिस मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात अपराधी सुजीत सिन्हा की मौत के बाद अब झारखंड पुलिस उसके आपराधिक नेटवर्क और अवैध संपत्तियों की तह तक पहुंचने में जुट गई है. जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि रंगदारी, लेवी और अवैध वसूली से कमाई गई रकम कहां-कहां निवेश की गई. देश के कई राज्यों के साथ-साथ विदेशों में बनाई गई चल और अचल संपत्तियों का भी ब्योरा जुटाया जा रहा है.
इस जांच की सबसे अहम कड़ी सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा का वह बयान माना जा रहा है, जो उसने वर्ष 2025 में गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूछताछ के दौरान दिया था. उसके बयान में करोड़ों रुपये के लेन-देन, बेनामी निवेश और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े कई चौंकाने वाले दावे सामने आए थे.
नेपाल में होटल में निवेश, विदेश तक फैला नेटवर्क
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, रिया सिन्हा ने पूछताछ में बताया था कि गिरोह की अवैध कमाई का एक हिस्सा नेपाल में भी लगाया गया. काठमांडू स्थित “रॉयल एंपायर बुटीक होटल” में उसकी साझेदारी होने की बात सामने आई थी. उसने दावा किया था कि यह होटल क्षितिज मुनन नामक व्यक्ति के साथ साझेदारी में संचालित किया जा रहा था. जांच एजेंसियां अब इस निवेश से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही हैं.
दुबई के जरिए बना पाकिस्तान नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया कि जेल में बंद रहने के दौरान सुजीत सिन्हा का संपर्क दुबई में छिपे धनबाद के कुख्यात अपराधी प्रिंस खान से हुआ था. पुलिस के अनुसार, इसी संपर्क के जरिए गिरोह की पहुंच पाकिस्तान के कथित “पठान नेटवर्क” तक बनी, जहां से अत्याधुनिक हथियारों की सप्लाई होने की आशंका जताई गई है. इस पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच भी अब एजेंसियों के दायरे में है.
जेल से चलता था रंगदारी का पूरा खेल
पुलिस जांच के मुताबिक, सुजीत सिन्हा जेल में रहते हुए भी अपने गिरोह का संचालन करता था. पूछताछ में रिया सिन्हा ने बताया था कि वह व्हाट्सएप और अन्य एन्क्रिप्टेड एप्लिकेशन के जरिए गिरोह के सदस्यों तक निर्देश पहुंचाती थी. गिरोह के शूटरों और सहयोगियों को यूपीआई के माध्यम से रकम भेजी जाती थी, ताकि लेन-देन पर आसानी से नजर न रखी जा सके.
जमीन विवाद सुलझाने के नाम पर करोड़ों की वसूली
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह केवल रंगदारी तक सीमित नहीं था, बल्कि जमीन विवादों में भी दखल देता था. रिया सिन्हा ने पूछताछ में बताया था कि जेल में रहते हुए भी सुजीत सिन्हा कई कारोबारियों और बिल्डरों के विवाद सुलझाने का काम करता था. ओरमांझी की एक जमीन के मामले में प्रति डिसमिल 30 हजार रुपये लेने और बदले में 10 डिसमिल जमीन अपने नाम कराने का भी दावा जांच में सामने आया है.
गिरोह के अन्य सदस्यों पर भी पुलिस की नजर
पुलिस के अनुसार, रिया सिन्हा ने पूछताछ के दौरान गिरोह से जुड़े कई लोगों के नाम भी बताए थे. अब जांच एजेंसियां उन सभी संदिग्धों की गतिविधियों, वित्तीय लेन-देन और नेटवर्क की जांच कर रही हैं. अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ गिरोह की संपत्तियों और उसके आर्थिक तंत्र से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं