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  • 2026-08-05

Supreme Court On Student Protest: लोकतंत्र में युवाओं की आवाज दबाने के बजाय सुनना जरूरी, छात्र आंदोलनों पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी; एजेंसियों को संयम बरतने की सलाह

Supreme Court On Student Protest: देशभर में बढ़ते छात्र आंदोलनों और हालिया हिंसक घटनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट ने लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उसे गंभीरता से सुनना जरूरी है. अदालत ने सुरक्षा एजेंसियों को भी प्रदर्शनकारियों से निपटने में संयम बरतने की सलाह दी.

"हिंसा का जवाब हिंसा नहीं होना चाहिए"
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रशासन को बेहद सावधानी से काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी ताकत लोगों की बात सुनना है. यह समझना जरूरी है कि प्रदर्शनकारी क्या कहना चाहते हैं और आखिर वे आंदोलन करने के लिए क्यों मजबूर हुए हैं.

पीठ ने कहा कि शांतिपूर्ण मार्च और प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को धैर्य और संयम बनाए रखना चाहिए. अदालत का मानना है कि बल प्रयोग या हिंसक प्रतिक्रिया से हालात सामान्य होने के बजाय और बिगड़ सकते हैं. युवाओं से संवाद स्थापित करना ही सबसे प्रभावी रास्ता है.

आयोजकों की जवाबदेही पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान एयरफोर्स के सेवानिवृत्त अधिकारियों की ओर से पेश वकील ने आंदोलन के आयोजकों की जिम्मेदारी का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने अदालत को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी के हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र में हुई घटनाओं के 15 दिन बाद भी कुछ कथित आयोजक खुलेआम मीडिया में बयान दे रहे हैं.

याचिकाकर्ता की ओर से सवाल किया गया कि जब किसी घटना के लिए पुलिस और सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही तय होती है, तो गैर-पंजीकृत संगठनों और उनके नेताओं की जवाबदेही क्यों तय नहीं होती. उनका कहना था कि ऐसे लोग माहौल शांत करने के बजाय उसे और भड़काने का काम कर रहे हैं.

एजेंसियों की भूमिका पर जताया भरोसा
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने में संयम की सलाह दी, लेकिन जांच और कार्रवाई को लेकर सुरक्षा एजेंसियों पर भरोसा भी जताया. पीठ ने कहा कि जमीनी परिस्थितियों को समझने और उससे निपटने का अनुभव एजेंसियों के पास अदालत से अधिक है.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि फिलहाल इस पूरे मामले को संबंधित एजेंसियों के विवेक पर छोड़ देना उचित होगा. अदालत अब अगली निर्धारित तारीख पर इस मामले में केंद्र सरकार का पक्ष सुनेगी और उसके बाद आगे की सुनवाई करेगी.



छात्र आंदोलनों को लेकर अहम संदेश
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को छात्र आंदोलनों और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच संतुलन बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है. अदालत ने साफ संकेत दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की शिकायतों और उनकी आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
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