Jamshedpur News: बिष्टुपुर रामदास भट्टा की संपत्ति को लेकर 5 करोड़ रुपये रंगदारी मांगने और जबरन कब्जा करने के लगाए गए आरोपों के बीच अब अशोक सिंह ने पूरे मामले पर अपना पक्ष सामने रखा है। अशोक सिंह ने आरोपों को खारिज करते हुए सवाल उठाया है कि अगर उनके साथ जबरदस्ती या बंदूक की नोक पर कोई पैसा अथवा पावर ऑफ अटॉर्नी लिया गया था, तो इसकी शिकायत करीब दो साल बाद क्यों की जा रही है?
अशोक सिंह का कहना है कि विक्रम शर्मा के साथ भूपेंद्र सिंह के कारोबारी संबंध थे और उनके बीच लंबे समय से लेन-देन एवं बिजनेस होता रहा है। ऐसे में अब अचानक यह कहना कि पैसा बंदूक की नोक पर लिया गया या जबरन संपत्ति से संबंधित दस्तावेज तैयार कराए गए, कई सवाल खड़े करता है।
अशोक सिंह ने दावा किया कि शहर में कई व्यापारी ऐसे हैं, जो विक्रम शर्मा के साथ कारोबार करते थे, हालांकि उन्होंने किसी व्यापारी का नाम लेने से इनकार किया। उनका कहना है कि कारोबारी रिश्तों को अब ऐसे रूप में पेश किया जा रहा है।
वहीं, अन्य व्यापारियों से पैसे लेने के आरोपों को लेकर भी अशोक सिंह ने दावा किया है। उनके मुताबिक, चार से पांच व्यापारियों से पैसे लिए जाने की बात सामने आ रही है और उनके साथ भूपेंद्र सिंह ने स्वयं एग्रीमेंट कर पैसे लिए थे। अशोक सिंह का दावा है कि इन लेन-देन में न तो विक्रम शर्मा और न ही उनका कोई संबंध था।
विक्रम शर्मा की मौत के बाद कारोबार की जिम्मेदारी अशोक सिंह के पास होने का दावा
विक्रम शर्मा की मौत के बाद उनसे जुड़े नेटवर्क और कारोबार में बदलाव को लेकर भी कई दावे सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दावा किया जा रहा है कि विक्रम उद्योग प्रा. लि. सहित उससे जुड़े कारोबार की जिम्मेदारी अशोक सिंह को सौंपी गई है।
बताया जा रहा है कि देहरादून से लेकर जमशेदपुर तक फैले स्टोन क्रशर, रियल एस्टेट और अन्य कारोबार की देखरेख भी उनके जिम्मे होने की बात कही जा रही है। इसके अलावा अखिलेश सिंह से जुड़ी करीब 670 करोड़ रुपये की संपत्ति की निगरानी की जिम्मेदारी भी उन्हें दिए जाने का दावा सामने आया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
अशोक सिंह ने आगे आरोप लगाया कि विक्रम शर्मा की मौत के बाद उनके नाम से जुड़े कारोबार में कथित तौर पर ED और इनकम टैक्स से जुड़ी परेशानियां सामने आ रही हैं। उनका दावा है कि इन परिस्थितियों से बचने के लिए अब पुराने कारोबारी लेन-देन और संपत्ति विवाद को अलग रूप देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका पक्ष है और इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही सामने आ सकती है। अशोक सिंह का कहना है कि 23 मार्च से पहले विक्रम उद्योग से उनका कोई लेना-देना नहीं था।
670 करोड़ की संपत्ति का मामला पहले भी रहा चर्चा में
अखिलेश सिंह से जुड़ी संपत्तियों को लेकर पूर्व में पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की कार्रवाई भी चर्चा में रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 29 मार्च 2017 को जिला पुलिस ने बिष्टुपुर स्थित सुजीत जैन अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 503 में छापेमारी की थी।
बताया गया था कि वहां से अचल संपत्तियों की खरीद-बिक्री से जुड़े कई मूल दस्तावेज बरामद किए गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पुलिस की ओर से ED को पत्र भेजे जाने और संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
बाद में ED की विशेष अदालत में चले मामले में साक्ष्यों के आधार पर राहत मिलने के बाद जब्त संपत्तियों को मुक्त करने का आदेश दिए जाने की बात सामने आई। इसके बाद करीब 670 करोड़ रुपये की संपत्ति रिलीज किए जाने का दावा किया गया था।
संपत्ति बेचने की कोशिश का भी लगाया आरोप
अशोक सिंह ने संपत्ति को लेकर एक और अहम दावा किया है। उनके मुताबिक, उक्त मकान के लिए किसी दूसरे व्यक्ति की ओर से अधिक कीमत दिए जाने का लालच दिए जाने के कारण उसे दूसरे व्यक्ति को बेचने की कोशिश की जा रही है और इसी वजह से उनके खिलाफ इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।
उन्होंने पावर ऑफ अटॉर्नी को लेकर कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से पावर ऑफ अटॉर्नी कराता है, तो बाद में सिर्फ संपत्ति या कारोबारी परिस्थिति बदलने पर यह कहना कि पावर जबरदस्ती कराया गया था, गंभीर सवाल खड़े करता है।
अशोक सिंह ने कहा कि दो साल बाद लगाए जा रहे आरोपों की टाइमलाइन, पुराने कारोबारी संबंध और पावर ऑफ अटॉर्नी से जुड़े दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए। साथ ही, जिन व्यापारियों से पैसे लिए जाने का दावा किया जा रहा है, उनके साथ हुए एग्रीमेंट और भुगतान के रिकॉर्ड की भी जांच जरूरी है।
फिलहाल संपत्ति विवाद को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। एक ओर भूपेंद्र सिंह ने पुलिस के समक्ष गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं अशोक सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पूरे मामले को कारोबारी और संपत्ति विवाद से जोड़कर देखा है। अब पूरे मामले में दस्तावेजों, एग्रीमेंट, लेन-देन और दोनों पक्षों के बयानों की जांच के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी।