Bangladesh Presidential Election: ढाका में बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति के चुनाव के लिए आज संसद भवन में वोटिंग हो रही है. करीब 35 साल बाद पहली बार इस पद के लिए दो उम्मीदवार चुनाव मैदान एक दूसरे प्रतिस्पर्धी बने हुए है. मतदान दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा, और मतदान प्रक्रिया समाप्त होने के बाद वोटों की गिनती शुरू होगी और मतगणना पूरी होते ही मुख्य चुनाव आयुक्त चुनाव परिणाम का ऐलान करेंगे. संसद में सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी का बहुमत होने के कारण उसके उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को मजबूत दावेदार माना जा रहा है. हालांकि आधिकारिक नतीजा वोटों की गिनती के बाद ही सामने आएगा.
संसद में बीएनपी का बहुमत इसलिए मिर्जा फखरुल का पलड़ा भारी
राष्ट्रपति चुनाव में बीएनपी ने मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को अपना उम्मीदवार बनाया है. उनके सामने कर्नल सेवानिवृत्त ओली अहमद हैं. ओली अहमद को बांग्लादेश जमात ए इस्लामी की अगुवाई वाले 11 दलों के गठबंधन ने प्रत्याशी बनाया है.
राष्ट्रपति का चुनाव संसद के भीतर हो रहा है. बांग्लादेश की संसद में कुल 350 सीटें हैं. इनमें 300 सामान्य सीटें हैं, जबकि 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं. चटगांव 4 सीट खाली होने के कारण इस बार 349 सांसद ही राष्ट्रपति चुनाव में वोट डाल सकेंगे.
मतदान संसद के मुख्य कक्ष में कराया जा रहा है. वोटिंग के लिए तीन घंटे का समय रखा गया है. शाम 5 बजे मतदान खत्म होने के बाद तुरंत मतगणना शुरू होगी. चुनाव प्रक्रिया को जनता के लिए खुला रखने के लिए वोटिंग से लेकर नतीजे आने तक की प्रक्रिया का सीधा प्रसारण भी किया जा रहा है.
इस चुनाव में संविधान का अनुच्छेद 70 भी खास चर्चा में है. इसके तहत अगर कोई सांसद अपनी पार्टी के खिलाफ संसद में वोट करता है तो उसकी सदस्यता खत्म हो सकती है. बीएनपी के पास संसद में बहुमत होने और इस संवैधानिक प्रावधान के चलते मिर्जा फखरुल की स्थिति और मजबूत मानी जा रही है.
चुनाव से एक दिन पहले बुधवार को बीएनपी संसदीय दल की बैठक भी हुई थी. संसद भवन की नौवीं मंजिल पर शाम 4 बजे हुई इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री और सदन के नेता तारिक रहमान ने की. राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर भी बैठक में मौजूद थे. बैठक के बाद मुख्य सचेतक नूरुल इस्लाम मोनी ने कहा कि यह चुनाव बांग्लादेश की लोकतांत्रिक यात्रा में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है.
1991 के बाद पहली बार दो उम्मीदवारों के बीच चुनाव
बांग्लादेश के राष्ट्रपति चुनाव में मौजूदा मुकाबला इसलिए भी खास है क्योंकि 8 अक्टूबर 1991 के बाद पहली बार दो उम्मीदवार मैदान में हैं. 1991 में बीएनपी के अब्दुर रहमान बिस्वास ने अवामी लीग के उम्मीदवार जस्टिस बदरुल हैदर चौधरी को हराया था. इसके बाद राष्ट्रपति पद के चुनावों में मुकाबला नहीं हुआ और उम्मीदवार बिना किसी विरोध के चुने जाते रहे.
करीब 35 साल बाद फिर दो प्रत्याशी आमने सामने हैं. यही वजह है कि इस चुनाव पर बांग्लादेश के बाहर भी नजर बनी हुई है. हालांकि संसद में दलों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए चुनावी नतीजे को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ मानी जा रही है.
बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनने की व्यवस्था भी कई बार बदल चुकी है. देश की आजादी के बाद 1974 में संसदीय व्यवस्था के तहत पहला राष्ट्रपति चुनाव हुआ था. उस समय संसद के स्पीकर मोहम्मदउल्लाह राष्ट्रपति बने थे.
इसके बाद 1978, 1981 और 1986 में राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता के वोट से कराया गया. इन तीन चुनावों में क्रमशः जिया उर रहमान, जस्टिस अब्दुस सत्तार और हुसैन मुहम्मद इरशाद राष्ट्रपति चुने गए.
वर्ष 1991 में बांग्लादेश में फिर संसदीय व्यवस्था लागू हुई. इसके बाद राष्ट्रपति को सीधे जनता नहीं बल्कि संसद के जरिए चुना जाने लगा. तब से राष्ट्रपति पद के चुनाव में किसी दूसरे उम्मीदवार के सामने आने की स्थिति नहीं बनी और सभी उम्मीदवार निर्विरोध चुने जाते रहे.
वोटिंग खत्म होते ही होगी गिनती और सामने आएगा फैसला
आज हो रहे चुनाव में सबसे पहले सांसद अपने वोट डालेंगे. मतदान का समय दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक है. इसके बाद मतपेटियों की गिनती की जाएगी. मतगणना पूरी होने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त आधिकारिक नतीजे की घोषणा करेंगे. इस पूरी प्रक्रिया को लाइव दिखाने की व्यवस्था की गई है, ताकि देश की जनता मतदान से लेकर परिणाम तक चुनाव की हर अहम प्रक्रिया देख सके.
करीब तीन दशक से ज्यादा समय बाद राष्ट्रपति पद के लिए मुकाबला होने से इस चुनाव का राजनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है. एक तरफ बीएनपी के पास संसद में स्पष्ट बहुमत है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन ने भी अपना उम्मीदवार उतारकर चुनाव को औपचारिक मुकाबले का रूप दिया है. अब सभी की नजरें शाम के बाद होने वाली मतगणना और मुख्य चुनाव आयुक्त की घोषणा पर टिकी हैं.