Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-08-22

Supreme Court News: CBSE की तीन भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, "कक्षा 6 के बच्चों पर न डालें पढ़ाई का अतिरिक्त दबाव, नीति पर करें पुनर्विचार"

Supreme Court News:  केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की तीन भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने CBSE से कक्षा 6 के छात्रों पर पड़ रहे पढ़ाई के अतिरिक्त दबाव को देखते हुए नीति पर फिर से विचार करने को कहा है. अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि अंग्रेजी को नॉन नेटिव भाषा की श्रेणी में रखने का आधार क्या है.


सुप्रीम कोर्ट ने अंग्रेजी को लेकर क्या कहा
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने अंग्रेजी को गैर देशज भाषा बताने वाली व्यवस्था पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि नेटिव शब्द का इस्तेमाल औपनिवेशिक सोच से जुड़ा हुआ लगता है. जस्टिस बागची ने इसके बजाय इंडिजिनस यानी देशज या स्वदेशी शब्द इस्तेमाल करने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि भारत में अंग्रेजी का इतिहास काफी पुराना है और समाज में इसका इस्तेमाल लंबे समय से हो रहा है.

अदालत के अनुसार, संवैधानिक और नीतिगत स्तर पर इस बात पर विचार जरूरी है कि भारत में अंग्रेजी को किस हद तक गैर देशज भाषा माना जा सकता है. इस सवाल को स्पष्ट करने से भाषा नीति से जुड़ी कई विसंगतियों को दूर करने में मदद मिल सकती है.

कक्षा 6 से तीसरी भाषा को लेकर क्यों उठ रहे सवाल
मौजूदा व्यवस्था में कक्षा 6 से छात्रों के लिए तीसरी भाषा पढ़ने का प्रावधान है. इसे लागू करने को लेकर लंबे समय से व्यावहारिक दिक्कतों की बात सामने आती रही है. संसद की एक उच्च स्तरीय समिति ने अपनी 10वीं रिपोर्ट में भी इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं. वर्ष 2026 से 27 के अनुमानों से जुड़ी इस रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूलों को नई भाषा व्यवस्था लागू करने के लिए पर्याप्त समय और संसाधन नहीं मिल पाए. कई स्कूलों में स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाएं पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षकों की कमी है. जरूरी किताबें और अध्ययन सामग्री भी समय पर उपलब्ध नहीं हो पाई. इसके अलावा शिक्षकों को नई भाषा व्यवस्था के मुताबिक पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिलने की समस्या भी सामने आई.


सरकार ने भाषा व्यवस्था के लिए क्या कदम उठाए
इन चुनौतियों को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर भाषा व्यवस्था में बदलाव किए हैं. इसके तहत R1, R2 और R3 का नया भाषा ढांचा तैयार किया गया है. छात्रों के लिए गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों की किताबों का 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में अनुवाद कराया गया है. भाषा सीखने में मदद के लिए ब्रिज कोर्स और डिजिटल ई कंटेंट भी तैयार किया गया है.

बच्चों को शुरुआती स्तर पर अलग अलग भाषाओं से परिचित कराने के लिए 22 भाषाओं में जादुई पिटारा नाम की खेल आधारित लर्निंग किट तैयार की गई है. भाषा संगम कार्यक्रम के जरिए भी छात्रों को विभिन्न भारतीय भाषाओं से जोड़ने की कोशिश की जा रही है. इसके अलावा केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान के सहयोग से 121 मातृभाषा प्राइमर तैयार किए गए हैं. केंद्रीय विद्यालयों जैसे संस्थानों में स्थानीय भाषाओं के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर शिक्षकों की नियुक्ति भी की जा रही है.


छात्रों पर दबाव कम होगा या नहीं
संसदीय समिति ने माना है कि तीसरी भाषा लागू करने से पहले स्कूलों की जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों का पर्याप्त आकलन नहीं किया गया. इससे खासकर कक्षा 6 के छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है. अब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद CBSE की तीन भाषा नीति में बदलाव की संभावना पर नजर है. अदालत ने केंद्र सरकार, CBSE और NCERT को नोटिस जारी करते हुए नीति पर पुनर्विचार की दिशा में कदम उठाने को कहा है. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि CBSE नीति में तत्काल क्या बदलाव करेगा. आगे की सुनवाई और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही कक्षा 6 के छात्रों को मिलने वाली संभावित राहत और भाषा व्यवस्था में किसी बदलाव की तस्वीर साफ होगी.


WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !