Jharkhand: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए युवाओं के आंदोलन के समर्थन में अपनी बात रखी है. चंपाई सोरेन ने कहा कि अगर सरकार यह मानती है कि पुलिस बल और लाठी के सहारे युवाओं की आवाज को रोक दिया जाएगा, तो यह उसकी बड़ी भूल है. उन्होंने कहा कि युवाओं की नाराजगी को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए.
इमरजेंसी का उदाहरण देकर सरकार को घेरा
चंपाई सोरेन ने अपने बयान में देश के राजनीतिक इतिहास का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने भी युवाओं और विरोध की आवाज को दबाने के लिए आपातकाल लगाया था. उनके मुताबिक, इसके बावजूद जनता की नाराजगी खत्म नहीं हुई और बाद में उसी सरकार को जनता ने सत्ता से हटा दिया. चंपाई ने इसी उदाहरण के जरिए कहा कि जनआंदोलन को बल प्रयोग से खत्म नहीं किया जा सकता.
झारखंड के परीक्षा विवाद पर राजस्थान की घटना का जिक्र
भाजपा नेता ने झारखंड में JPSC और JSSC CGL को लेकर चल रहे विवाद के बीच राजस्थान की SI भर्ती परीक्षा का उदाहरण सामने रखा. उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में राजस्थान की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान SI यानी दरोगा भर्ती परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आया था. इस परीक्षा से करीब 3.83 लाख अभ्यर्थी जुड़े थे, जिनका भविष्य इस विवाद के कारण प्रभावित हुआ.
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला
चंपाई सोरेन ने कहा कि सरकार बदलने के बाद राजस्थान मामले की जांच आगे बढ़ी. इसी मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पानी से जहर की कुछ बूंदों को अलग करना संभव नहीं होता. उन्होंने इसी उदाहरण को भर्ती परीक्षा से जोड़ते हुए कहा कि अगर पूरी प्रक्रिया ही दूषित हो जाए, तो केवल कुछ हिस्सों को अलग करके समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता.
सरकार पर छात्रों से वादा तोड़ने का आरोप
चंपाई सोरेन ने झारखंड सरकार पर आरोप लगाया कि परीक्षा विवाद में छात्रों की मांगों को लेकर पहले CBI जांच से इनकार किया गया. उन्होंने दावा किया कि छात्रों को भरोसा दिलाकर आंदोलन समाप्त कराया गया, लेकिन उसके अगले दिन अदालत में सरकार की ओर से प्रभावी तरीके से अपना पक्ष नहीं रखा गया.
छात्रों पर कार्रवाई का भी विरोध
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इसके बाद जब छात्र अपनी मांगों को लेकर दोबारा आंदोलन करने सड़क पर उतरे, तो उनके खिलाफ पुलिस और समर्थित लोगों के जरिए बल प्रयोग किया गया. उन्होंने छात्रों के साथ मारपीट, मुकदमे दर्ज करने और आंदोलन को दबाने की कोशिश का आरोप लगाया. चंपाई सोरेन ने कहा कि युवाओं की समस्याओं का समाधान बातचीत और निष्पक्ष कार्रवाई से होना चाहिए, न कि दमन से.