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  • 2025-04-17

Jharkhand Corruption: भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा बुजुर्ग ग्राम प्रधान, वर्षों से भटकने के बाद अब न्यायालय की शरण में, पढ़िए पूरा मामला

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Seraikela: झारखंड के प्रखंड और अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार की गंगा बह रही है. ऐसा हम नहीं बल्कि विपक्ष कई बार आरोप लगा चुका है. इसका जीता- जागता उदाहरण सरायकेला- खरसावां जिला के ईचागढ़ अंचल कार्यालय में देखने को मिल रहा है. जहां अंचल कार्यालय के भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मियों का खामियाजा एक 70 वर्षीय बुजुर्ग ग्राम प्रधान भुगत रहे हैं. दरअसल ईचागढ़ प्रखंड में मैसाड़ा पंचायत के बुरुहातू ग्राम प्रधान बलभद्र गोराई साल 2006 से ही ग्राम प्रधान चुने गए थे और तब से वे लगातार ग्रामीणों को अपनी सेवा दे रहे हैं. साल 2019 में सरकार ने ग्राम प्रधानों के लिए दो हजार रुपए मानदेय देने की घोषणा की उसके बाद साजिश के तहत अंचल प्रशासन ने दूसरे गांव के व्यक्ति को ग्राम प्रधान के रूप में मनोनीत कर दिया और सरकार से दी जाने वाली राशि उसे देना शुरू कर दिया. इसकी भनक जब बलभद्र गोराई को लगी तब उन्होंने अंचल कार्यालय का दौड़ लगाना शुरू किया. मगर दिन महीने साल गुजरते रहे बलभद्र गोराई अंचल कार्यालय का चक्कर काटते- काटते थक चुके हैं और अब उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है. ग्राम प्रधान का दावा है कि अंचलाधिकारी और पूर्व के नाजिर को नजराना नहीं चढ़ाने की सजा उन्हें मिल रही है. उन्होंने कहा कि अब न्यायालय से ही इंसाफ की उम्मीद रह गई है. 

इधर मीडिया में आंचल प्रशासन की कारगुजारी एक्सपोज होते ही अंचलाधिकारी के हाथ- पांव फूलने लगे और मीडिया के सवालों पर हकलाते हुए स्वीकार किया कि पूर्व के नाजिर की गलती से बुजुर्ग ग्राम प्रधान को परेशानी हुई है. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की पड़ताल कर ली गई है बलभद्र गोराई को लेकर किसी प्रकार की कोई आपत्ति नहीं है. ग्रामीणों की ओर से सहमति मिल गई है. जल्द ही उनका मानदेय उन्हें दिया जाएगा.
 
अब सवाल यह उठता है कि आखिर इतने दिनों तक आंचल प्रशासन क्या कर रहा था ? क्यों बुजुर्ग ग्राम प्रधान बलभद्र गोराई की बात नहीं सुनी जा रही थी ? क्यों मीडिया में एक्सपोज होने के बाद अंचलाधिकारी हरकत में आए और अपनी गलती स्वीकारने के बजाय सेवानिवृत हो चुके पूर्व नाजिर के माथे पर दोष मढ़कर अपना पल्ला झाड़ लिया.
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