Sahibganj Water Supply Scheme: साहिबगंज के ग्रामीण क्षेत्रों में साफ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने से जुड़ी मेधा पेय जलापूर्ति योजना का मामला झारखंड हाई कोर्ट पहुंच गया है. योजना में हो रही देरी पर अदालत ने सरकार से जवाब मांगा है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के प्रधान सचिव को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. अदालत ने सरकार से पूछा है कि मेधा पेय जलापूर्ति योजना आखिर कब तक शुरू होगी. मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी.
2012 में शुरू होनी थी योजना
जनहित याचिका दाखिल करने वाले सिद्धेश्वर मंडल की ओर से कोर्ट को बताया गया कि साहिबगंज के ग्रामीण इलाकों में योजना की शुरुआत वर्ष 2012 में होनी थी. याचिकाकर्ता के मुताबिक, करीब 14 साल बीत जाने के बाद भी योजना जमीन पर शुरू नहीं हो सकी है. इस वजह से ग्रामीणों को अब भी सुरक्षित पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है.
पानी में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा
मामले की सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया. बोर्ड ने माना है कि संबंधित इलाकों के पानी में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मात्रा काफी अधिक है. ऐसे में ग्रामीणों के लिए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करना जरूरी बताया गया है. इसी मांग को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है. अब सरकार के जवाब के बाद 24 सितंबर को होने वाली सुनवाई में इस मामले में आगे की स्थिति साफ हो सकती है.