Pakur News: पाकुड़ के अमड़ापाड़ा में पचुवाड़ा नॉर्थ कोल ब्लॉक से प्रभावित परिवारों के बीच शुक्रवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी पहुंचे. उन्होंने कई विस्थापित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से सीधे उनकी समस्याएं जानीं. इस दौरान जमीन, रोजगार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया.
पांच गांवों में ग्रामीणों से सीधी बातचीत
बाबूलाल मरांडी ने चिल्गो, विशुनपुर, कठालडीह, तालझारी और सिंहदेहरी का दौरा किया. यहां उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर विस्थापन के बाद मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली. ग्रामीणों ने बताया कि पुनर्वास के बावजूद कई बुनियादी जरूरतों से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं. इनमें जमीन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसे मुद्दे शामिल हैं.
अगली पीढ़ी के भविष्य को लेकर चिंता
ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता केवल वर्तमान सुविधाओं तक सीमित नहीं रही. उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन और रोजगार की स्थायी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए. ग्रामीणों का कहना था कि मौजूदा पीढ़ी के लिए कुछ व्यवस्थाएं की गई हैं, लेकिन बच्चों के भविष्य को लेकर अभी स्पष्ट योजना दिखाई नहीं देती.
50 से 100 साल की योजना की जरूरत
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि विस्थापन और पुनर्वास को केवल आज की जरूरतों के हिसाब से नहीं देखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक, योजना ऐसी होनी चाहिए जो अगले 50 से 100 वर्षों को ध्यान में रखकर तैयार की जाए. इससे विस्थापित परिवारों की अगली पीढ़ी को रोजगार की तलाश में दूसरे इलाकों में जाने की मजबूरी न हो.
अधिकार दिलाने की जिम्मेदारी सरकार और कंपनी की
मरांडी ने कहा कि विस्थापित परिवारों को उनका उचित अधिकार मिलना चाहिए. पुनर्वास के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर भी पर्याप्त ध्यान देना जरूरी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इन सुविधाओं के मामले में किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए. विस्थापित परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करना प्राथमिकता होनी चाहिए.
उपायुक्त से बातचीत का भरोसा
ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर बाबूलाल मरांडी ने उपायुक्त से बातचीत करने की बात कही. जरूरत पड़ने पर मामले को सरकार के स्तर पर भी उठाने का आश्वासन दिया. पचुवाड़ा नॉर्थ कोल ब्लॉक से प्रभावित परिवारों की मांगों और पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं पर आगे क्या कार्रवाई होती है, यह देखने वाली बात होगी.