Jharkhand Recruitment Controversy: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की जांच और रद्दीकरण के बीच अब नगरपालिका सेवा नियुक्ति परीक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि इस भर्ती में भी पहले से अनियमितता के आरोप लगाए जाते रहे हैं. इसके बावजूद हाल में भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार की ओर से जारी कार्रवाई में नगरपालिका सेवा नियुक्ति परीक्षा का नाम नहीं है.
921 पदों पर हुई थी नियुक्ति
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC ने नगरपालिका सेवा में नियुक्ति के लिए विज्ञापन संख्या 7/2023 जारी किया था. इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए कुल 921 पदों पर नियुक्ति की गई. इनमें 645 पद सेनेटरी सुपरवाइजर के थे. 24 पद सेनेटरी एंड फूड इंस्पेक्टर के लिए रखे गए थे. इसके अलावा 184 राजस्व निरीक्षक, 46 विधि सहायक, 12 उद्यान अधीक्षक और 10 पशु चिकित्सा पदाधिकारी के पद भी शामिल थे.
नियुक्ति में पहले ही लगे थे आरोप
नगरपालिका सेवा की इस भर्ती को लेकर प्रक्रिया के दौरान ही कई तरह के सवाल सामने आए थे. कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि कुछ अधिकारियों के परिवार और रिश्तेदारों से जुड़े अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिली. नेताओं से जुड़े लोगों के चयन को लेकर भी सवाल उठाए गए थे. इसके अलावा कुछ सफल अभ्यर्थियों के रोल नंबर लगातार होने को भी कथित गड़बड़ी के संकेत के तौर पर बताया गया था. हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच या किसी सक्षम प्राधिकरण के निष्कर्ष के आधार पर ही हो सकती है.
22 परीक्षाएं रद्द, लेकिन नगरपालिका भर्ती का नाम नहीं
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार ने हाल में कई बड़े फैसले लिए हैं. सरकार की ओर से 22 परीक्षाओं को रद्द किया गया है. छह अन्य परीक्षाओं की प्रक्रिया पर रोक लगाई गई है. वहीं 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया है. लेकिन इन फैसलों से जुड़े आदेशों में नगरपालिका सेवा नियुक्ति परीक्षा का उल्लेख नहीं है.
जांच में शामिल नहीं होने पर उठ रहा सवाल
यही वजह है कि अब नगरपालिका सेवा की भर्ती को लेकर सवाल फिर उठने लगे हैं. जब इस परीक्षा में भी पहले से अनियमितता के आरोप लगाए जाते रहे हैं, तो मौजूदा जांच से इसे अलग क्यों रखा गया है, इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है. हालांकि, सरकार की ओर से नगरपालिका सेवा नियुक्ति को जांच में शामिल नहीं करने के पीछे कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है.
फिलहाल इस भर्ती में लगाए गए पुराने आरोपों और मौजूदा सरकारी कार्रवाई के बीच अंतर को लेकर सवाल बने हुए हैं. यदि सरकार इस भर्ती की भी जांच कराती है, तो आरोपों की वास्तविकता और नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर स्थिति ज्यादा साफ हो सकती है.