Jamshedpur Cyber Crime News: साइबर ठगों ने बागबेड़ा थाना के ड्राइवर सचेता नन्द के मोबाइल का WhatsApp हैक कर एक महिला को ठगी के जाल में फंसाने की कोशिश की. घटना के बाद महिला का मोबाइल और WhatsApp भी हैक हो गया. इसके बाद उसके कॉन्टैक्ट्स को भी इसी तरह के मैसेज भेजे जाने लगे.
चालान के नाम पर भेजा APK लिंक
बताया गया कि कल दोपहर करीब 12 बजे लोको कॉलोनी निवासी बबिता करवा के मोबाइल पर एक मैसेज आया. मैसेज बागबेड़ा थाना के ड्राइवर सचेतानंद के नंबर से आया था. मैसेज में लिखा था कि गाड़ी का ऑनलाइन चालान हुआ है. इसके साथ एक लिंक भेजा गया था. लिंक पर क्लिक कर चालान भरने को कहा गया. मैसेज में यह भी लिखा था कि महिला और सचेतानंद, दोनों का चालान हुआ है. लिंक का नाम mParivahan चालान APK जैसा बताया जा रहा है.
परिचित नंबर देखकर महिला ने खोल दिया लिंक
मैसेज परिचित नंबर से आया था. इसलिए महिला को शक नहीं हुआ. उन्होंने लिंक पर क्लिक कर दिया. इसके बाद उनके मोबाइल का सिम और WhatsApp काम करना बंद हो गया. कुछ ही देर में उन्हें समझ आया कि मोबाइल का कंट्रोल किसी और के हाथ में चला गया है.
महिला के कॉन्टैक्ट्स को भी भेजे गए मैसेज
मोबाइल पर नियंत्रण मिलने के बाद साइबर ठगों ने महिला के कॉन्टैक्ट्स को भी मैसेज भेजना शुरू कर दिया. इन मैसेज में भी इसी तरह का लिंक भेजा गया. आरोप है कि महिला के कुछ परिचितों ने ठगों के भेजे मैसेज पर भरोसा कर पैसे भी भेज दिए. इसके बाद हैकर महिला को फोन कर गाली-गलौज करने लगे.
पहले थाना ड्राइवर का WhatsApp हुआ हैक
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह सामने आ रही है कि साइबर ठगों ने कथित तौर पर पहले बागबेड़ा थाना के ड्राइवर सचेतानंद का WhatsApp हैक किया. इसके बाद उनके नंबर से महिला को चालान वाला मैसेज भेजा गया. परिचित नंबर होने के कारण महिला ने लिंक खोल दिया और उनका फोन भी साइबर ठगों के कब्जे में चला गया.
साइबर थाना में शिकायत, आवेदन लेने को लेकर विवाद
घटना के बाद महिला ने बिष्टुपुर साइबर थाना में शिकायत की. बताया गया कि साइबर थाना की मदद से मोबाइल को दोबारा सुरक्षित किया गया. हालांकि, महिला का आरोप है कि पुलिस ने उनकी लिखित शिकायत नहीं ली. महिला के मुताबिक, पुलिस की ओर से कहा गया कि जब तक खाते से पैसे नहीं कटे हैं, तब तक आवेदन नहीं लिया जाएगा. फिलहाल मामले में किसी खाते से रकम कटने की पुष्टि नहीं हुई है. यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि परिचित नंबर से आए चालान या किसी सरकारी सेवा से जुड़े APK लिंक को भी बिना जांचे खोलना कितना जोखिम भरा हो सकता है.