Jharkhand High Court: जमशेदपुर निवासी निशार हसन उर्फ निशु को झारखंड हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है. अदालत ने उसके खिलाफ जारी प्रिवेंटिव डिटेंशन के आदेश में दखल देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी. सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि निशार हसन के खिलाफ छह आपराधिक मामले और 10 सनहा दर्ज हैं. इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम से जुड़े मामले शामिल हैं.
निशार हसन की ओर से दलील दी गई कि जिन छह मामलों का जिक्र किया गया है, उनमें उसे जमानत मिल चुकी है. इसके बावजूद उसके खिलाफ प्रिवेंटिव डिटेंशन का आदेश जारी किया गया. वहीं, सरकार ने उसे आदतन अपराधी बताते हुए हिरासत का बचाव किया. सरकार का आरोप है कि जेल में रहने के दौरान भी वह अपने साथियों के जरिए आपराधिक गतिविधियां संचालित कर रहा था और रंगदारी वसूली जा रही थी.
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी को आपराधिक मामलों में जमानत मिल जाना अपने आप प्रिवेंटिव डिटेंशन के आदेश को गलत नहीं बनाता. अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और परिस्थितियों को देखते हुए हिरासत के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया.
2025 में पहली बार हुआ था आदेश
निशार हसन के खिलाफ पहली बार 7 अक्टूबर 2025 को प्रिवेंटिव डिटेंशन का आदेश जारी किया गया था. इसके बाद हिरासत की अवधि को कई बार तीन-तीन महीने के लिए बढ़ाया गया. कोर्ट के आदेश में विदेश से आपराधिक गतिविधियां संचालित करने के आरोप का भी उल्लेख किया गया है. फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले के बाद उसकी प्रिवेंटिव डिटेंशन जारी रहेगी.