Jharkhand News: झारखंड में JSSC-JPSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर सियासत तेज है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार से जांच और कार्रवाई को लेकर कई सवाल पूछे हैं. उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति के आरोप या अपराध के आधार पर पूरे जिले या पूरे राज्य को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है.
बाबूलाल ने देवघर और गिरिडीह का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी व्यक्ति का नाम परीक्षा में गड़बड़ी या नौकरी के नाम पर पैसे लेने के मामले में सामने आता है, तो उसके लिए पूरे जिले को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता. उन्होंने यह भी कहा कि किसी मामले को लेकर पूरे झामुमो को दोषी ठहराना भी उचित नहीं होगा.
JPSC-JSSC में नियुक्तियों पर सवाल
बाबूलाल मरांडी ने JPSC और JSSC के पूर्व अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा. उन्होंने सवाल उठाया कि JPSC के अध्यक्ष के तौर पर एल ख्यांगते की नियुक्ति किसने की थी. इसी तरह JSSC के अध्यक्ष पद पर नीरज सिन्हा की नियुक्ति को लेकर भी उन्होंने सवाल खड़े किए.
बाबूलाल ने JSSC पेपर लीक की जांच को लेकर अनुराग गुप्ता की भूमिका पर भी सवाल उठाया. उनका दावा है कि पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने पर "कांके रोड कनेक्शन" सामने आता है. उन्होंने सरकार से पूछा कि जांच से जुड़े जिन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, उनके खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है.
ACB दस्तावेज और डेटा को लेकर आरोप
बाबूलाल ने नीरज सिन्हा, सुधीर गुप्ता और प्रशांत कुमार का नाम लेते हुए भी सरकार से जवाब मांगा. उन्होंने अनुराग गुप्ता पर आरोप लगाया कि ACB से जुड़े दस्तावेज और कंप्यूटर का डेटा बाहर ले जाया गया. साथ ही उन्होंने दावा किया कि बड़े लोगों को बचाने के लिए शराब घोटाले और JSSC मामले से जुड़े सबूतों को नुकसान पहुंचाया गया.
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल किया कि जिन अधिकारियों पर आरोप लगाए जा रहे हैं, उन्हें आखिर किसका संरक्षण मिला हुआ है. उन्होंने कहा कि अगर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी होती है, तो जांच में कई अहम बातें सामने आ सकती हैं.
बंगाल कनेक्शन पर भी सवाल
बाबूलाल ने पश्चिम बंगाल के नियामतपुर में कथित तौर पर अभ्यर्थियों को क्वेश्चन पेपर रटवाए जाने के मामले का भी जिक्र किया. उन्होंने सवाल उठाया कि जब परीक्षा गड़बड़ी के मामलों में बंगाल से जुड़े इनपुट सामने आते हैं, तो जांच में "बंगाल कनेक्शन" की बात करने से क्यों बचा जाता है.
हालांकि, बाबूलाल मरांडी की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. इन दावों पर सरकार का पक्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर और स्पष्ट होगी.