Potka Health Centre: पोटका विधानसभा क्षेत्र में करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से बने स्वास्थ्य केंद्र की हालत ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. भवन का निर्माण वर्ष 2025 में पूरा हुआ था, लेकिन करीब एक साल के भीतर ही इसकी दीवारों और कई हिस्सों में दरारें दिखाई देने लगी हैं. सबसे खास बात यह है कि स्वास्थ्य केंद्र का विधिवत उद्घाटन भी नहीं हुआ था. इसके बावजूद भवन की स्थिति को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं.
मार्च में कराया गया था उद्घाटन
जानकारी के अनुसार, मार्च 2026 में स्वास्थ्य विभाग की ओर से वहां मौजूद चिकित्सकों की मौजूदगी में उद्घाटन कराया गया था. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कार्यक्रम में पोटका विधायक संजीव सरदार और सांसद को आमंत्रित नहीं किया गया था.
पेंट के बाद भी नहीं छिपीं दरारें
भवन की दीवारों पर कई जगह मोटी दरारें दिखाई दे रही हैं. बताया जा रहा है कि इन्हें छिपाने के लिए पेंट कराया गया था. लेकिन कुछ हिस्सों में दरार इतनी स्पष्ट है कि उसने पेंट की परत को भी फाड़ दिया है. इससे निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और काम की गुणवत्ता को लेकर सवाल और बढ़ गए हैं.
स्वास्थ्यकर्मियों में भी डर
स्वास्थ्य केंद्र में काम करने वाली नर्स और एएनएम भी भवन की स्थिति को लेकर परेशान हैं. उनका कहना है कि काम के दौरान उन्हें भवन की सुरक्षा को लेकर डर बना रहता है. यहां रोज मरीज और उनके परिजन भी पहुंचते हैं. ऐसे में भवन की मजबूती की जांच जल्द कराए जाने की जरूरत है.
जेएलकेएम ने जांच की मांग की
स्वास्थ्य केंद्र में आई दरारों को लेकर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांति मोर्चा यानी जेएलकेएम ने भी सवाल उठाए हैं. संगठन की ओर से पूरे निर्माण कार्य की जांच कराने की मांग की गई है. आरोप है कि अभी तक न तो कोई ठोस जांच हुई है और न ही निर्माण एजेंसी या ठेकेदार पर कार्रवाई की गई है.
विधायक ने घटिया ईंट को बताया वजह
मामले को लेकर पोटका विधायक संजीव सरदार से फोन पर बात की गई. उन्होंने कहा कि आचार संहिता के दौरान ठेकेदार ने आनन-फानन में आधारशिला रखी थी और इसके बाद निर्माण शुरू हुआ. विधायक के अनुसार, निर्माण में घटिया ईंट का इस्तेमाल होने के कारण भवन में दरारें आई हैं. उन्होंने मामले में कार्रवाई की मांग करने की बात भी कही.
11 करोड़ के भवन की गुणवत्ता जांच जरूरी
करीब 11 करोड़ रुपये की लागत वाले स्वास्थ्य केंद्र में इतनी जल्दी दरारें आने से निर्माण की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं. वहीं, विधायक की ओर से भी कार्रवाई की बात कही गई है और जेएलकेएम जांच की मांग कर रहा है. ऐसे में अब पूरे भवन की तकनीकी जांच कराए जाने की जरूरत है. स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के साथ डॉक्टर, नर्स और दूसरे कर्मचारी भी रहते हैं. इसलिए भवन की संरचनात्मक मजबूती की जांच कर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि दरारें कितनी गंभीर हैं और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है.