खड़गपुर से झारसुगुड़ा तक चौथी लाइन
कैबिनेट ने खड़गपुर से झारसुगुड़ा के बीच 367 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन को मंजूरी दी है. यह रूट मुंबई हावड़ा हाई डेंसिटी रेल कॉरिडोर का हिस्सा है. इस परियोजना पर करीब 6,528 करोड़ रुपये खर्च होंगे. नई लाइन बनने के बाद इस रूट पर ट्रेनों के संचालन के लिए ज्यादा जगह मिलेगी. इससे यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों की आवाजाही को बेहतर करने में मदद मिलेगी. ट्रेनों की देरी कम करने की दिशा में भी यह परियोजना अहम मानी जा रही है.
अरक्कोनम से रेनिगुंटा तक दो नई लाइनें
कैबिनेट ने अरक्कोनम से रेनिगुंटा के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन को भी मंजूरी दी है. यह परियोजना 77 किलोमीटर लंबी होगी. इस पर करीब 1,936 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. नई पटरियां बनने से इस रूट पर ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ेगी. साथ ही दक्षिण मध्य रेलवे नेटवर्क की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है.
7 बड़े रूट से गुजरता है करीब 40 प्रतिशत रेल ट्रैफिक
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि देश में करीब 11,000 किलोमीटर के हाई डेंसिटी रेल कॉरिडोर हैं. इनमें 7 बड़े रूट ऐसे हैं, जिनसे देश का करीब 40 प्रतिशत रेल ट्रैफिक गुजरता है. सरकार इन सभी 7 रूट को 4 लेन रेल नेटवर्क में बदलने की योजना पर काम कर रही है. इन रूट पर करीब 2,000 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है. करीब 5,000 किलोमीटर पर काम चल रहा है या इसकी मंजूरी मिल चुकी है. वहीं करीब 4,000 किलोमीटर के लिए DPR तैयार की जा रही है.
इन बड़े रेल रूट को मजबूत करने की योजना
सरकार की योजना देश के प्रमुख रेल रूट को आपस में बेहतर तरीके से जोड़ने की है. इसमें दिल्ली मुंबई, मुंबई चेन्नई, चेन्नई कोलकाता और कोलकाता दिल्ली रूट शामिल हैं. इसके अलावा दिल्ली चेन्नई और मुंबई कोलकाता डायगोनल रूट भी इस योजना का हिस्सा हैं. दिल्ली से गुवाहाटी तक के रेल मार्ग को भी इस नेटवर्क में शामिल किया गया है. सरकार का लक्ष्य इन व्यस्त रूट पर बढ़ते यात्री और माल ट्रैफिक को संभालने के लिए रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना है.खड़गपुर झारसुगुड़ा और अरक्कोनम रेनिगुंटा परियोजनाओं को मिली मंजूरी इसी बड़े प्लान का हिस्सा है.