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  • 2025-07-10

Intermediate Student Andolan: इंटर के छात्रों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन पर, उग्र रूप लेने की आशंका

Intermediate Student Andolan: राजभवन के माध्यम से झारखंड के सभी विश्वविद्यालयों को आदेश दिया गया था कि इस शैक्षणिक सत्र से 11वीं का नामांकन कॉलेज में नहीं लिया जाएगा। राजभवन के माध्यम से यह हवाला दिया गया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूरी तरह से लागू करने के लिए कॉलेज में इंटर के नामांकन को पूरी तरह से बंद किया जाएगा।

साथ ही सत्र (2024-2026) इंटर के वैसे विद्यार्थी जो अभी 12वी कक्षा में हैं, किसी कॉलेज से इंटर की पढ़ाई कर रहे हैं उन्हें कॉलेज के 5 किलोमीटर की परिधि में सरकारी विद्यालयों में भेजा जाएगा।

इस निर्णय के बाद से झारखंड के विभिन्न जिलों में छात्र-छात्राएं व्यापक रूप से विरोध प्रदर्शन कर रहें हैं। कोल्हान प्रमंडल में इस आंदोलन का नेतृत्व इंटरमीडिएट बचाओ संघर्ष समिति और अन्य छात्र संगठनों द्वारा किया जा रहा है। पिछले 8 जुलाई को जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित माइकल जॉन ऑडिटोरियम में झारखंड राज्य के शिक्षा मंत्री का घेराव छात्रों ने किया गया था । छात्र-छात्राओं के वाजिब सवालों का जवाब शिक्षा मंत्री के पास नहीं था।

इसके बाद शिक्षा मंत्री ने छात्र-छात्राओं के इस आंदोलन को दूसरे राजनीतिक दलों का षड्यंत्र बताया है। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन(AIDSO ) झारखंड राज्य कमिटी ने झारखंड के शिक्षा मंत्री के इस बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।और कहा है कि जहां एक ओर पूरे झारखंड भर में हजारों छात्र-छात्राएं नामांकन लेने के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। और 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं पढ़ाई करने के बजाएं आंदोलन करने को विवश है। ऐसे में छात्र-छात्राओं की समस्याओं को दरकिनार करते हुए ,झारखंड सरकार और राजभवन एक दूसरे के ऊपर इसका आरोप लगा रहे है।

एक ओर झारखंड सरकार द्वारा छात्रों की संख्या के अनुसार प्लस टू विद्यालयों का निर्माण नहीं करवा पाई है ।और ना ही आधारभूत संरचना और शिक्षकों की नियुक्ति कर पाई है। ऐसे में हजारों छात्र-छात्राएं शिक्षा से वंचित होंगे या महंगी शिक्षा पाने को विवश होंगे। 12वीं कक्षा के विद्यार्थी पढ़ने के बजाय अब शिक्षा मंत्री से यह सवाल कर रहे हैं कि आखिर उनकी पढ़ाई होगी कहां और कैसे ? इस सवाल पर शिक्षा मंत्री छात्रों के आंदोलन को विपक्ष की साजिश और दिल्ली में आंदोलन करने की बात कहना बिल्कुल दुर्भाग्यपूर्ण है। राज्य सरकार एक ओर जहां नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को स्वयं लागू की है वही दिखावे के रूप में इसे विपक्ष की साजिश बता रही है। सरकार स्वयं यह स्पष्ट नहीं कि है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को आखिर लागू किया किसने,बीच सत्र में छात्र कॉलेज से क्यों दूसरे जगह शिफ्ट हो,छात्रों की संख्या के अनुसार में स्कूल न होने पर बाकी छात्र क्या करेंगे ?

AIDSO प्रदेश सचिव सोहन महतो ने कहा है कि राज्य सरकार और शिक्षा मंत्री को यह सोचना चाहिए कि इन झारखंड के बच्चों के भविष्य को कैसे सुधारा जाए? उनकी समस्याओं का निदान किया जाना चाहिए, ना कि इस तरह के बेबुनियादी बातें छात्र-छात्राओं के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए। यदि छात्र-छात्राओं के जायज मांग पर जल्द कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन उग्र आंदोलन करेगी।

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