रात के करीब 11 बजे, जब पूरा बाजार बंद हो चुका था, लालजीत साव और उनके पड़ोसी दिलीप साव के आलू-प्याज के गोदाम से आग की लपटें उठने लगीं थीं। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और पूरे गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटों को देखकर आसपास के लोग और दुकानदार तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने बिना किसी देरी के आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया। बाल्टियों और पानी के पाइपों की मदद से लोगों ने आग पर काबू पाने की कोशिश की, ताकि यह आसपास की दुकानों और घरों तक न फैले। उनका यह साहस और एकजुटता सराहनीय थी, क्योंकि दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही उन्होंने आग को एक हद तक नियंत्रित कर लिया था।
आग लगने की वजह और दमकल की चुनौती
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह आग किसी शरारती तत्व द्वारा छोड़े गए पटाखे की चिंगारी से भड़की थी। दीपावली के समय अक्सर ऐसी घटनाएं होती हैं, लेकिन इस बार चिंगारी ने इतना बड़ा नुकसान कर दिया, की पूरा गोदाम जल कर राख हो गया। दमकल विभाग को तुरंत इसकी सूचना दी गई, लेकिन घटनास्थल पर पहुंचने में उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी। हीरापुर हटिया की संकरी गलियां और बाजार के अंदर तक पहुंचने के लिए रास्ता न होने के कारण दमकल की गाड़ी गोदाम तक नहीं पहुंच पाई। दमकल कर्मियों को काफी दूर गाड़ी खड़ी करनी पड़ी और पाइपों को खींचकर आग बुझाने का काम करना पड़ा।
बड़ा नुकसान और भविष्य की ओर ध्यान
आग लगने से गोदाम में रखा लाखों रुपये का आलू और प्याज जलकर नष्ट हो गया। लालजीत साव और दिलीप साव का बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। यह उनके लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि उनकी आजीविका इसी गोदाम पर निर्भर करती थी। इस घटना ने एक बार फिर से शहर के व्यस्त और तंग बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के लिए इन इलाकों में पहुंचना कितना मुश्किल है, यह इस घटना से साफ हो गया है। स्थानीय प्रशासन को इस पर ध्यान देने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
सतर्कता की ओर ध्यान
इस घटना ने यह भी सिखाया है कि पटाखों का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए। एक छोटी सी गलती बड़ी तबाही का कारण बन सकती है। प्रशासन और स्थानीय लोगों को मिलकर ऐसे उपायों पर काम करना चाहिए, जिससे ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और अगर हों भी तो उन पर जल्द से जल्द काबू पाया जा सके।