Chaibasa: चाईबासा गौशाला की जमीन पर वन विभाग द्वारा जैव विविधता पार्क और औषधीय उद्यान के निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। गौशाला का दावा है कि यह जमीन उनकी है, जहां गोवंश की आश्रय स्थली है और हरा चारा का उत्पादन होता है, और उनके पास जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज हैं।
उपायुक्त कार्यालय ने दिया प्रमाण पत्र
उपायुक्त कार्यालय ने 2 फरवरी 2024 को प्लॉट नंबर 13 के 2.77 एकड़ भूमि पर जैव विविधता पार्क बनाने के लिए चाईबासा वन प्रमंडल को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया। सारंडा वन प्रमंडल द्वारा निर्माण कार्य शुरू किया गया, जिसके बाद गौशाला कमेटी ने झारखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। न्यायालय ने 22 अगस्त 2025 को कार्य स्थगन आदेश पारित किया, लेकिन निर्माण कार्य बंद नहीं हुआ। गौशाला कमेटी ने अवमानना याचिका दायर की है क्योंकि उन्हें सूचित करने के बावजूद निर्माण कार्य नहीं रोका गया।
भूमि का अनापत्ति प्रमाण पत्र चाईबासा वन प्रमंडल को दिया गया, लेकिन निर्माण सारंडा वन प्रमंडल कर रहा है, जो उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। गौशाला सहकोषाध्यक्ष मधुसूदन अग्रवाल ने कहा कि न्यायालय के आदेश के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने पर अवमानना याचिका दायर की गई है।
चाईबासा गौशाला भूमि विवाद से सीख
चाईबासा गौशाला भूमि विवाद यह सिखाता है कि विकास कार्य और पर्यावरण संरक्षण की योजनाएं कानून और न्यायालय के आदेशों के दायरे में रहकर ही किए जाने चाहिए। नागरिकों और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है कि किसी भी परियोजना को शुरू करने से पहले भूमि स्वामित्व और कानूनी प्रक्रिया की पूरी स्पष्टता सुनिश्चित करें, ताकि विवाद जैसी स्थितियों से बचा जा सके और पारदर्शिता के साथ विकास कार्य आगे बढ़ सके।