जागरूकता अभियान का प्रथम चरण
अवैध अफीम की खेती को रोकने के लिए पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुनायत के निर्देश पर एक व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत, पुलिस अधिकारी गाँव-गाँव जाकर स्थानीय लोगों, मानकी मुंडाओं और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। इसी कड़ी में हाल ही में दलभंगा ओपी परिसर में आयोजित एक बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे, जहाँ पुलिस अधिकारियों ने अफीम की खेती के गंभीर परिणामों और इसके कानूनी प्रावधानों के बारे में जानकारी दी।
अफीम के नुकसान और कानूनी प्रावधानों की जानकारी
सरायकेला के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी ने ग्रामीणों को उनकी स्थानीय भाषा में समझाया कि अफीम की खेती न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह उन्हें गंभीर कानूनी मुश्किलों में भी डाल सकती है। उन्होंने बताया कि अगर कोई भी व्यक्ति अवैध अफीम की खेती करता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस बैठक में उपस्थित मानकी मुंडाओं और जनप्रतिनिधियों ने भी इस अभियान का समर्थन करते हुए शपथ ली कि वे अफीम की खेती नहीं करेंगे और दूसरों को भी ऐसा करने से रोकेंगे।
पिछले साल की सफलता का असर दिखा
यह अभियान पिछले साल की सफलता पर आधारित है, जब जिला पुलिस ने राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर एक बड़ा अभियान चलाकर करीब 625 एकड़ भूभाग पर हो रही अफीम की खेती को नष्ट कर दिया था। उस अभियान का ही नतीजा है कि आज उन खेतों में धान की फसल लहलहा रही है, जो इस बात का सबूत है कि सही दिशा में प्रयास करने पर सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। पुलिस के इस प्रयास से अब क्षेत्र की तस्वीर बदलने लगी है और ग्रामीण भी जागरूक हो रहे हैं।
सरकार की भूमिका और आगे की कदम
पुलिस अधीक्षक लुनायत ने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि वे पारंपरिक खेती को बढ़ावा दें। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगर इसके बाद भी कहीं से अवैध अफीम की खेती की सूचना मिलती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस अभियान को पूरी तरह से सफल बनाने के लिए केवल पुलिस के प्रयास ही काफी नहीं हैं। किसानों को पारंपरिक खेती की ओर मोड़ने के लिए सरकार को भी अपनी प्रतिबद्धता दिखानी होगी। किसानों को समय पर उन्नत बीज, खाद और सिंचाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करानी होगी ताकि वे अफीम जैसी अवैध फसल की बजाय पारंपरिक फसलों से भी अच्छी कमाई कर सकें।
किसानों की जागरूकता पर पहल
फिलहाल, पुलिस अपने स्तर पर किसानों को जागरूक करने का हर संभव प्रयास कर रही है। यह उम्मीद की जा रही है कि पुलिस और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयासों से इस क्षेत्र में अवैध अफीम की खेती पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी और किसान एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ सकेंगे।