जानिए कैसे लगी आग
जानकारी के अनुसार, गैरेज के मालिक संतोष कुमार ने विश्वकर्मा पूजा के उपलक्ष्य में अपनी दुकान, जिसका नाम संतोष गैरेज बताया जा रहा है, में विधिवत पूजा-अर्चना की थी। पूजा के बाद वह दुकान बंद कर घर चले गए थे। आशंका जताई जा रही है कि गैरेज में रखे दिए से अचानक आग लग गई। दुकान बंद होने के कारण आग धीरे-धीरे भड़कती गई और देखते ही देखते इसने अपना विकराल रूप धारण कर लिया। आग की लपटें और धुंआ देखकर स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना गैरेज मालिक संतोष कुमार को दी।
मालिक झुलसा, लाखों का सामान हुआ राख
सूचना मिलते ही गैरेज मालिक संतोष कुमार घटनास्थल पर पहुंचे और अपनी दुकान को जलता देख आग बुझाने का प्रयास करने लगे। इसी कोशिश में वे स्वयं आग की चपेट में आ गए और बुरी तरह झुलस गए। घायल अवस्था में स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इधर, स्थानीय लोगों ने सूझबूझ और कड़ी मशक्कत से आग पर काबू पाने का प्रयास किया। जब तक आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाया गया, तब तक गैरेज का सारा सामान जलकर पूरी तरह खाक हो चुका था। इस घटना में लाखों रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है, जिसमें मोटर पार्ट्स, रिपेयरिंग टूल्स और अन्य कीमती सामान शामिल थे।
पुलिस और अग्निशमन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर आरोप
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में बागबेड़ा पुलिस और अग्निशमन विभाग की कार्यशैली को लेकर गहरा आक्रोश है। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि इतनी बड़ी भयंकर आग लगने की सूचना तत्काल पुलिस और फायर ब्रिगेड को दी गई थी, लेकिन न तो बागबेड़ा पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और न ही अग्निशमन विभाग के कोई पदाधिकारी या कर्मचारी आग बुझाने के लिए आए।स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि अगर अग्निशमन विभाग समय पर पहुंच जाता तो शायद दुकान का इतना बड़ा नुकसान होने से बचाया जा सकता था।
इलाज सदर अस्पताल में
उनका कहना है कि पुलिस और फायर ब्रिगेड की इस लापरवाही के कारण ही गैरेज का मालिक इतना बड़ा नुकसान झेलने पर मजबूर हुआ और आग बुझाने के क्रम में स्वयं भी घायल हो गया। स्थानीय लोगों की त्वरित कार्रवाई से ही आग पर काबू पाया जा सका, नहीं तो यह और भी विकराल रूप ले सकती थी। गंभीर रूप से झुलसे गैरेज मालिक संतोष कुमार का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।