हजारों की संख्या में जुटे प्रदर्शनकारी
सुबह से ही इन दोनों स्टेशनों पर समुदाय के हजारों लोग पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-नगाड़े बजाते और नाचते-गाते हुए रेलवे ट्रैक पर उतर आए और जमकर सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी की। आंदोलन के कारण इन महत्वपूर्ण रेलखंडों पर ट्रेन परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ, जिससे दूरगामी ट्रेनों का आवागमन ठप हो गया और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
कुड़मी समुदाय के नेताओं का स्पष्ट कहना
कुड़मी समुदाय के नेताओं का स्पष्ट कहना है कि इन मांगों को लेकर वे कई बार सरकार को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। उनका यह भी कहना है कि जब तक केंद्र और राज्य सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक यह आंदोलन और तेज किया जाएगा।
सुरक्षा बल तैनात, प्रशासन की अपील
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेलवे और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर पहुँचकर हालात संभालने की कोशिश की। रेलवे ट्रैक पर भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। प्रशासन ने आंदोलनकारियों से शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने और जल्द से जल्द ट्रैक खाली करने की अपील भी की है।
यह पहला मामला नहीं
गौरतलब है कि कुड़मी समाज द्वारा रेलवे ट्रैक जाम करने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी ऐसे प्रदर्शन किए जा चुके हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और युवा इस अनिश्चितकालीन धरने में शामिल होकर अपनी माँगों के प्रति अपनी एकजुटता और दृढ़ता दिखा रहे हैं।
कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा
इस आंदोलन ने एक बार फिर झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने और उनकी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिए जाने के गंभीर मुद्दे को केंद्र में ला दिया है।