E Kalyan Scholarship: झारखंड के ओबीसी छात्रों को लंबे समय से छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिल रहा है. आवेदन तो छात्रों ने समय पर किए, सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी हुई, लेकिन अब तक राशि उनके खातों में नहीं पहुंची. इसके चलते गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्र शिक्षा और भविष्य के बीच फंसे हुए हैं और उनका आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है.
छात्रहित सर्वोपरी मंच ने इस गंभीर स्थिति के विरोध में 8 अक्टूबर को मोरहाबादी स्थित कल्याण आयुक्त कार्यालय के बाहर महाआंदोलन करने का एलान किया है. मंच ने छात्रों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है और इसके लिए सोशल मीडिया पर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है. यह कैंपेन जेएलकेएम, रांची के नाम से बने एक्स हैंडल के माध्यम से प्रचारित किया जा रहा है.
जेएलकेएम विधायक जयराम कुमार महतो के निजी सचिव संजय कुमार का कहना है कि छात्रों के ज्ञापन मिलने पर पार्टी छात्र हित में हर संभव सहयोग करेगी. छात्र मंच का आरोप है कि झारखंड सरकार अब तक ओबीसी छात्रों की ई-कल्याण स्कॉलरशिप 2024-25 जारी नहीं कर पाई है. इसका खामियाजा गरीब छात्रों को भुगतना पड़ रहा है क्योंकि उनकी पढ़ाई और शिक्षा की संभावनाएं ठप पड़ चुकी हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार से फंड आवंटन के लिए कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है. जब तक केंद्र से फंड नहीं आता, तब तक राज्य सरकार छात्रवृत्ति जारी नहीं कर सकती. अनुमान है कि ओबीसी छात्रवृत्ति के लिए करीब 700 करोड़ रुपये की आवश्यकता है. कल्याण आयुक्त ने भी कहा है कि उन्हें आंदोलन और छात्रों की नाराजगी की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली है.
छात्रवृत्ति दो कैटेगरी में दी जाती है. प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति कक्षा 1 से 10 तक के छात्रों के लिए होती है. इसमें कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों का भुगतान राज्य सरकार करती है, जबकि कक्षा 9 और 10 के छात्रों को प्रति वर्ष 4,500 रुपये दिए जाते हैं. इस राशि में एससी और ओबीसी छात्रों के लिए केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत और 40 प्रतिशत होती है. एसटी छात्रों के लिए केंद्र सरकार 75 प्रतिशत राशि देती है और शेष 25 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करती है. पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति में छात्रों को प्रति वर्ष 30,000 से 1,00,000 रुपये तक की राशि उपलब्ध कराई जाती है. इसके लिए छात्रों को ई-कल्याण पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है और कई स्तर पर आवेदन की जांच और स्वीकृति के बाद ही छात्रवृत्ति का लाभ मिलता है.
मामला पिछले दो साल से लटका हुआ है. हर साल औसतन 6 लाख आवेदन पोर्टल पर अपलोड होते हैं, जिनमें आधी से अधिक संख्या ओबीसी छात्रों की होती है. अनुमान है कि करीब 1 लाख ओबीसी छात्रों को 2023-24 की छात्रवृत्ति नहीं मिली है, जबकि लगभग 3 लाख छात्र 2024-25 की छात्रवृत्ति का इंतजार कर रहे हैं. यह स्थिति छात्रों और उनके परिवारों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है.
29 अगस्त 2022 को जारी नियमावली के अनुसार पिछड़ा वर्ग के छात्रों की पोस्ट-मैट्रिक शिक्षा में अधिक से अधिक भागीदारी बढ़ाने और शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. आवेदन का सत्यापन सबसे पहले संस्थान के आईएनओ यानी इंस्टीट्यूट नोडल ऑफिसर द्वारा किया जाता है, उसके बाद जिला कल्याण पदाधिकारी के स्तर पर आवेदन की स्वीकृति आवश्यक होती है. इसके बाद भी कई प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद ही छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ मिलता है.
लेकिन अब पूरा मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है. इसका खामियाजा गरीब और वंचित ओबीसी छात्रों को भुगतना पड़ रहा है. केंद्र और राज्य सरकारों की खींचतान के बीच बच्चे अपनी पढ़ाई और भविष्य दोनों से संघर्ष कर रहे हैं. सवाल उठता है कि कब जागेगी सरकार और कब मिलेगा छात्रों को उनका हक.