Jharkhand News: झारखंड में इन दिनों नकली दूध का घिनौना खेल चल रहा है. दूध रोजमर्रा की जरूरत है और इसे बच्चे, बुजुर्ग, सभी अपने स्वास्थ्य के लिए भरोसे के साथ पीते हैं. लेकिन अब यही भरोसा खतरे में है. बेरमो थाना क्षेत्र के फुसरो नगर परिषद के शांतिनगर इलाके में रसायन और पाउडर मिलाकर नकली दूध तैयार किया जा रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ दिखता है कि कैसे कुछ लोग तरल में केमिकल मिलाकर दूध जैसा पदार्थ बना रहे हैं. यह सिर्फ धोखा नहीं, बल्कि जनता की सेहत से सीधा खिलवाड़ है.
जानकारों के अनुसार इस तरह का दूध लिवर, किडनी और पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह बेहद खतरनाक है. सवाल है कि जब यह वीडियो आम लोगों तक पहुंच गया तो क्या यह प्रशासन की नजर से बचा हुआ है या नजरअंदाज किया जा रहा है. क्या सरकार को पता नहीं कि बाजार में ऐसे जहरीले उत्पाद बेचे जा रहे हैं.
सूत्र बताते हैं कि यह नकली दूध बनाने वाला पाउडर अब सिर्फ छुपकर नहीं, बल्कि मिठाई की दुकानों तक पहुंच चुका है. एक किलो पाउडर से 7 से 8 किलो तक दूध तैयार किया जा रहा है. त्योहारों के इस मौसम में जब मिठाई, पनीर और दही की खपत बढ़ी है, तब दुकानदार बिना जांच के इस पाउडर का इस्तेमाल कर रहे हैं. कुछ का कहना है कि यह हानिकारक नहीं है. लेकिन सवाल उठता है, क्या आम जनता की सेहत पर फैसला अब दुकानदार की राय से होगा या सरकार की जिम्मेदारी तय होगी.
स्वास्थ्य विशेषज्ञ साफ चेतावनी दे रहे हैं कि संदिग्ध दूध से बचें. लेकिन जिम्मेदारी सिर्फ जनता पर क्यों डाली जा रही है. सरकार कब तक ऐसे खतरनाक कारोबार पर चुप रहेगी. क्या खाद्य विभाग अब भी सैंपल जांच का इंतजार करेगा या किसी बड़ी घटना के बाद जागेगा. जब पूरे राज्य की सेहत दांव पर हो तो क्या कार्रवाई का इंतजार जायज है.
त्योहारों के बीच बाजार में बढ़ती मांग के साथ नकली दूध का जहर फैल रहा है. क्या सरकार इस पर स्वतः संज्ञान लेकर सैम्पल जांच करेगी. क्या दूध विक्रेताओं और मिठाई दुकानों से नमूने लेकर लैब भेजे जाएंगे. अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो क्या यह मान लिया जाए कि लोगों की सेहत सरकार की प्राथमिकता में नहीं. जनता पूछ रही है, आखिर कब तक हमारी थालियों में जहर परोसा जाएगा.