Jharkhand News: सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता (सीजीएल)-2023 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. प्रकाश कुमार समेत अन्य याचियों की इस याचिका पर चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई की.
मामले में महाधिवक्ता राजीव रंजन ने पक्ष रखा और बताया कि अब तक की जांच में प्रश्नपत्र लीक होने के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं. CID की जांच में भी पेपर लीक की पुष्टि नहीं हुई है. केवल संभावित प्रश्न मिलने की बात सामने आयी थी, जिससे संदेह उत्पन्न हुआ. उन्होंने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि संतोष मस्ताना नामक व्यक्ति से दोबारा पूछताछ की गई है, लेकिन प्रश्नपत्र लीक का मामला स्पष्ट नहीं हुआ.
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को निर्धारित की है और पूर्व में जारी अंतरिम आदेश (स्टे) को बरकरार रखा है. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल और प्रिंस कुमार उपस्थित रहे, जबकि सफल अभ्यर्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता वी मोहाना, गोपाल शंकर नारायणन और अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा.
उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ताओं ने सीजीएल परीक्षा को रद्द करने और पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है. उनका आरोप है कि परीक्षा में प्रश्नपत्र का सील खुला होना, पेपर लीक और बड़ी संख्या में प्रश्नों का दोहराव जैसी अनियमितताएं हुईं. सीजीएल-2023 परीक्षा में 3,04,769 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था, जिसके माध्यम से 2025 पदों पर नियुक्ति की जानी है.