Gamharia: देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शुमार सरायकेला-खरसावां जिले से मजदूरों के शोषण का एक गंभीर मामला सामने आया है। उषा मार्टिन कंपनी के अधीन वर्षों से कार्यरत रहे करीब 225 ठेका मजदूर अब टाटा स्टील लोंग प्रोडक्ट्स के अधीन आने के बावजूद अपने फूल एंड फाइनल भुगतान के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। पूर्व में उषा मार्टिन के अंतर्गत कार्यरत रहे इन मजदूरों को कंपनी टाटा ग्रुप को हैंडओवर के बाद भी उनके पूर्व के बकाए वेतन, पीएफ, बोनस और अन्य सेटलमेंट का भुगतान नहीं किया गया। इनमें से कई मजदूर रिटायर हो चुके हैं, जबकि शेष रिटायरमेंट के कगार पर हैं।
4.5 करोड़ रुपये तक का अनुमानित बकाया
सूत्रों की मानें तो यदि एक मजदूर का औसतन सेटलमेंट दो लाख रुपये हो, तो 225 मजदूरों का बकाया आंकड़ा करीब 4.5 करोड़ रुपये तक पहुंचता है।
ठेकेदार कंपनियां भी मुकर रहीं
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि एबी इंजीनियरिंग के 14, जी कंस्ट्रक्शन के 99 और एसएसपी के 112 मजदूरों का फाइनल भुगतान भी अटका हुआ है। इन मजदूरों का आरोप है संबंधित ठेका कंपनियों ने अब हाथ खड़े कर लिए हैं और टाटा स्टील अथवा उषा मार्टिन प्रबंधन भी इस मामले से दूरी बना रहा है।
मजदूरों की हालत दयनीय, श्रम कार्यालय के काट रहे चक्कर
60 साल की उम्र पार कर चुके मजदूर अपने जीवनभर की कमाई के लिए भगवान भरोसे श्रम कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं। कई मजदूरों के पास इलाज और परिवार चलाने तक के पैसे नहीं बचे हैं।
श्रम अधीक्षक ने ठेकेदारों को नोटिस भेजने की बात कही
इस पूरे प्रकरण को लेकर जब श्रम अधीक्षक अविनाश कुमार से झारखंड न्यूज़ 26 के संवाददाता ने बातचीत की, तो उन्होंने बताया संबंधित ठेकेदारों को नोटिस भेजा जा रहा है। श्रम विभाग मामले को गंभीरता से देख रहा है और जांच प्रक्रिया जारी है।
सवाल कायम, कौन दिलाएगा मजदूरों को न्याय?
मजदूरों का सवाल है जब टाटा ग्रुप ने उषा मार्टिन को टेकओवर किया, तो पुराने कर्मियों के हक का क्या होगा? क्या रिटायर हो चुके मजदूरों की मेहनत की कमाई इसी तरह अधर में रह जाएगी?अब देखना यह होगा लौहनगरी के इन सैकड़ों मजदूरों को उनका हक कब तक और कैसे मिलेगा।