Bihar Elections: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी है और इसी बीच भाकपा (माले) ने अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी कर दी है. पार्टी ने कुल 20 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है, जो दो चरणों में होने वाले चुनाव को ध्यान में रखकर चुने गए हैं. इस सूची में कई ऐसी सीटें शामिल हैं जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं, यह संकेत देता है कि माले सामाजिक और वर्गीय प्रतिनिधित्व को केंद्र में रखते हुए अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है.
माले ने भोजपुर, सारण, समस्तीपुर, पटना, आरा, सिवान, अरवल और औरंगाबाद जैसे इलाकों में अपने उम्मीदवार उतारकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल सीमित प्रभाव तक सीमित रहने को तैयार नहीं, बल्कि महागठबंधन के भीतर अपनी राजनीतिक हैसियत को स्थापित करने की कोशिश में है.
माले की पहली सूची, पहले चरण के उम्मीदवार
भोर (एससी - 103) : धनंजय
ज़िरदेई (106) : अमरजीत कुशवाहा
दरौली (एससी - 107) : सत्यदेव
दरौंडा (109) : अमरनाथ यादव
कल्याणपुर (एससी - 131) : रंजीत कुमार राम
वारिसनगर (132) : फूलबाबू सिंह
राजगीर (एससी - 173) : बिश्वनाथ चौधरी
डीघा (181) : दिव्या गौतम
फुलवारी (एससी - 188) : गोपाल रविदास
पालीगंज (190) : संदीप सौरव
आरा (194) : कयूमुद्दीन अंसारी
अगियौन (एससी - 195) : शिव प्रकाश रंजन
तरारी (196) : मदन सिंह
दुमरांव (201) : अजीत कुमार सिंह
दूसरे चरण के उम्मीदवार
सिकटा (09) : वीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता
पीपरा (42), सुपौल : अनिल कुमार
बलरामपुर (65) : महबूब आलम
कराकट (213) : अरुण सिंह
अरवल (214) : महानंद सिंह
घोसी (217) : राम बली सिंह यादव
महागठबंधन के लिए नई चुनौती
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है. आरजेडी की बड़ी भूमिका और कांग्रेस की उपस्थिति के बीच माले की यह सूची दबाव की रणनीति मानी जा रही है. माले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल समर्थन की राजनीति नहीं करेगी, बल्कि चुनावी मैदान में प्रत्यक्ष मुकाबले के लिए तैयार है.
माले का बदला हुआ रुख
पहले सीमित इलाकों तक सिमटी रहने वाली माले अब बिहार की मुख्य लड़ाई में शामिल होना चाहती है. पार्टी ने अपनी सूची में युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जुझारू चेहरों को शामिल किया है. यह कदम दर्शाता है कि माले न सिर्फ अपने संगठन को विस्तार दे रही है, बल्कि हाशिए पर रहे वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का राजनीतिक संदेश भी दे रही है.
माले की यह सूची बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की शुरुआत का संकेत है. महागठबंधन के भीतर इसे दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जबकि भाजपा गठबंधन के लिए यह एक अलग वैचारिक चुनौती होगी. माले का फोकस जाति, वर्ग और जनाधिकार आधारित राजनीति है, जो ग्रामीण इलाकों में मजबूत पकड़ रखती है. यदि महागठबंधन सीट फॉर्मूले को लेकर देरी करता है, तो माले कई सीटों पर सीधी टक्कर देने की स्थिति में आ सकती है. यह चुनाव केवल सत्ता का नहीं, बल्कि विचारधारा बनाम गठबंधन की मजबूरी का भी परीक्षण होगा.