Jharkhand News: धनबाद के एक कोयला कारोबारी से पैसे मांगने के आरोप में इंस्पेक्टर गणेश सिंह पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने इंटेलिजेंस रिपोर्ट दर्ज की है. इसके साथ ही उनके खिलाफ जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है. एसीबी सूत्रों के अनुसार शिकायतकर्ता कारोबारी ने आरोप लगाया था कि गणेश सिंह ने कथित रूप से धन की मांग की, जिसके बाद मामले की प्रारंभिक जांच की गई.
प्राथमिक जांच में आरोपों को गंभीर मानते हुए शुक्रवार को एसीबी ने IR दर्ज करने की कार्रवाई को अंजाम दिया. गणेश सिंह पहले एसीबी में तैनात थे और वर्तमान में झारखंड जगुआर में पदस्थापित हैं. साथ ही वे डीजीपी कार्यालय में एनजीओ प्रभारी की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे.
सूत्र बताते हैं कि यह पहली बार नहीं है जब गणेश सिंह का नाम ऐसे विवाद में आया है. हजारीबाग में तैनाती के दौरान भी उन पर एक कोयला कारोबारी से वसूली के आरोप लगे थे, जिसकी जांच की गई थी. एसीबी में तैनाती के दौरान भी उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज हुई थीं.
सरकारी स्तर पर तब बदलाव हुए जब डीजीपी अनुराग गुप्ता की जगह एडीजी प्रिया दुबे को एसीबी का प्रमुख बनाया गया. इसी के बाद पुलिस मुख्यालय ने गणेश सिंह का तबादला एसीबी से हटाकर झारखंड जगुआर में कर दिया.
अब एसीबी की जांच इस मामले में आगे की कार्रवाई तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या यह मामला रिश्वतखोरी का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आता है.
इंस्पेक्टर गणेश सिंह पर दर्ज यह IR पुलिस महकमे की साख पर गंभीर सवाल खड़ा करती है. एक ऐसे अधिकारी पर आरोप, जो एसीबी जैसे अहम पद पर रह चुका हो, प्रशासनिक व्यवस्था में नैतिकता और पारदर्शिता पर चिंता को गहरा करता है. यह भी महत्वपूर्ण है कि पहले से आरोप झेल चुके अधिकारी को संवेदनशील पदों पर बनाए रखना कितनी दूरदर्शिता का संकेत था. अगर एसीबी इस मामले में कठोर रुख अपनाती है, तो यह पुलिस बल में अनुशासन और जवाबदेही की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच निष्पक्ष रूप से होती है या आरोप फिर से किसी फाइल में ही दबकर रह जाते हैं.