Bihar Breaking: बिहार के गोपालगंज जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जहां एक साधारण चाय बेचने वाले के घर से पुलिस ने 1 करोड़ 5 लाख 49 हजार 850 रुपये नकद और भारी मात्रा में सोना-चांदी बरामद किया है. पुलिस ने इस मामले में दो भाइयों को गिरफ्तार किया है जिन पर अंतरराज्यीय साइबर अपराध गिरोह चलाने का आरोप है.
घटना गोपालगंज जिले के अमाईठी खुर्द गांव की है. खुफिया जानकारी के आधार पर शुक्रवार देर रात पुलिस ने छापा मारा. जब जांच की गई तो पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ गए. घर से 1 करोड़ 5 लाख 49 हजार 850 रुपये नकद के साथ 344 ग्राम सोना और 1.75 किलोग्राम चांदी जब्त की गई.
साइबर डीएसपी अवंतिका दिलीप कुमार ने बताया कि छापेमारी के दौरान 85 एटीएम कार्ड, 75 बैंक पासबुक, 28 चेकबुक, कई आधार कार्ड, दो लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन और एक लक्जरी कार भी बरामद की गई है. शुरुआती जांच में यह सामने आया कि आरोपी गिरोह अलग-अलग लोगों के बैंक खातों के जरिए अवैध तरीके से कमाया गया पैसा ट्रांसफर करते थे और बाद में उसे नकदी के रूप में निकाल लेते थे.
दुबई से चलता था नेटवर्क
पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह का मास्टरमाइंड अभिषेक कुमार नामक युवक पहले एक छोटी सी चाय की दुकान चलाता था. धीरे-धीरे वह साइबर अपराध के इस नेटवर्क से जुड़ गया और बाद में दुबई चला गया. वहीं से वह इस पूरी धोखाधड़ी का संचालन करता था. उसका भाई आदित्य कुमार भारत में रहकर पैसों का लेनदेन और लॉजिस्टिक्स का काम संभालता था.
पुलिस को जांच के दौरान यह भी पता चला कि जब्त की गई अधिकांश पासबुक बेंगलुरु की विभिन्न बैंकों से जारी की गई थीं. इससे साफ है कि नेटवर्क का विस्तार झारखंड, कर्नाटक और अन्य राज्यों तक फैला हुआ है.
जांच में शामिल हुई कई एजेंसियां
गिरफ्तार किए गए दोनों भाइयों से पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है. जब्त किए गए लैपटॉप और मोबाइल फोनों का डेटा खंगाला जा रहा है ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके. इस पूरे मामले में अब आयकर विभाग और आतंकवाद विरोधी दस्ता (एटीएस) भी शामिल हो गए हैं ताकि पैसों के स्रोत और किसी बड़े साइबर सिंडिकेट से संभावित संबंधों का पता लगाया जा सके.
गोपालगंज का यह मामला सिर्फ एक जिले का नहीं बल्कि पूरे देश में तेजी से फैलते साइबर अपराध नेटवर्क की भयावह तस्वीर पेश करता है. एक समय सड़क किनारे चाय बेचने वाला व्यक्ति जब करोड़ों की रकम और सोने का मालिक बन जाता है तो यह कानून व्यवस्था और वित्तीय सुरक्षा दोनों के लिए खतरे का संकेत है.
पुलिस की जांच यह भी दिखाती है कि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में साइबर अपराध की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं. यह नेटवर्क अब अंतरराज्यीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है. दुबई से संचालन और बेंगलुरु की पासबुक का मिलना यह दर्शाता है कि यह कोई स्थानीय ठगी नहीं बल्कि संगठित साइबर माफिया का हिस्सा है.
जरूरत इस बात की है कि पुलिस के साथ-साथ बैंकों और साइबर सिक्योरिटी एजेंसियों को भी इस पर समन्वित तरीके से काम करना होगा, क्योंकि अगर ऐसे मामलों पर जल्द नकेल नहीं कसी गई तो आने वाले वक्त में छोटे कस्बों से बड़े अपराधियों का निकलना आम बात बन जाएगी.