Jharkhand News: झारखंड सरकार ने सचिवालय सहायकों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है जिससे लंबे समय से चली आ रही उनकी मांग आखिरकार पूरी होती दिख रही है. सरकार ने झारखंड सचिवालय सहायकों के संयुक्त संवर्ग के कर्मचारियों को संशोधित सुनिश्चित वृति योजना यानी एमएसीपी के तहत तीसरे वित्तीय उन्नयन का लाभ देने की स्वीकृति प्रदान कर दी है. इसका मतलब यह है कि अब जो सहायक 30 साल की सेवा पूरी कर चुके हैं, उन्हें थर्ड एमएसीपी का लाभ मिलेगा.
यह फैसला सचिवालय के हजारों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है जो लंबे समय से पदोन्नति और वेतनमान में सुधार की उम्मीद लगाए बैठे थे. अब उन्हें पीबी-111 वेतनमान 15600-39100 ग्रेड वेतन 7600 रुपये के तहत वित्तीय लाभ प्राप्त होगा. इस निर्णय के बाद उनके वेतन और करियर दोनों में सकारात्मक बढ़ोतरी होगी.
एमएसीपी यानी संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति योजना केंद्र सरकार की वह व्यवस्था है जिसके तहत किसी कर्मचारी को यदि समय पर पदोन्नति नहीं मिल पाती तो उसे 10, 20 और 30 साल की सेवा पूरी होने पर स्वतः वित्तीय उन्नयन का लाभ मिलता है. यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई थी ताकि कर्मचारियों को हतोत्साहित होने से बचाया जा सके और उन्हें उनके कार्य के अनुरूप प्रोत्साहन दिया जा सके. योजना का लाभ उन्हीं कर्मचारियों को मिलता है जिनकी वार्षिक प्रदर्शन रिपोर्ट पिछले तीन वर्षों में बहुत अच्छा श्रेणी में होती है.
कार्मिक विभाग ने इस संबंध में सभी विभागों को पत्र जारी कर दिया है. पत्र में कहा गया है कि तीसरे एमएसीपी से जुड़ा प्रस्ताव भेजने के लिए संबंधित विभाग अपने स्तर से आवश्यक दस्तावेज और विवरण तैयार कर भेजें ताकि योजना के लाभार्थियों को शीघ्र फायदा मिल सके.
इस फैसले से सचिवालय के कर्मचारियों में उत्साह का माहौल है. यह कदम न सिर्फ कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा बल्कि उनकी कार्यक्षमता और मनोबल भी बढ़ाएगा.
इस फैसले को झारखंड सरकार की कर्मचारियों के प्रति सकारात्मक सोच के संकेत के रूप में देखा जा सकता है. लंबे समय से सचिवालय सहायकों में पदोन्नति रुक जाने की वजह से असंतोष का माहौल था. तीसरे एमएसीपी का लाभ मिलने से यह असंतोष काफी हद तक खत्म होगा. साथ ही यह फैसला राज्य के अन्य विभागों के कर्मचारियों के लिए भी मिसाल बनेगा कि सरकार समय-समय पर सेवा शर्तों में सुधार के लिए तैयार है. हालांकि वित्त विभाग पर इसका अतिरिक्त बोझ जरूर पड़ेगा, लेकिन कर्मचारी कल्याण और प्रशासनिक संतुलन के लिहाज से यह फैसला दूरगामी और लाभकारी माना जा रहा है.