saraikela: सरायकेला जिले के बड़ा हरिहरपुर गाँव में आदिवासी समाज का प्रमुख पर्व देश बांधना सोहराय इस वर्ष भी पारंपरिक रीति-रिवाजों और अपार उल्लास के साथ मनाया गया। यह पर्व मानव और पशु के सह-अस्तित्व के गहरे संबंध को दर्शाता है और आदिवासी संस्कृति की विशिष्टता एवं प्रकृति प्रेम को उजागर करता है।
यह पर्व चार दिनों तक चलता
यह पर्व चार दिनों तक चलता है, जिसकी जानकारी देते हुए पूर्व प्रमुख रामदास टुडू ने इसे आदिवासी समाज का एक अत्यंत महत्वपूर्ण त्यौहार बताया, पर्व के अवसर पर, हरिहरपुर फुटबॉल मैदान में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन
पर्व के अवसर पर, हरिहरपुर फुटबॉल मैदान में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान बैलों को विशेष रूप से सजाया गया। आदिवासी महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की।कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पुरुषों द्वारा बैलों को नचाना रहा। पुरुषों ने गाजे-बाजे की थाप और पारंपरिक नृत्यों की लय पर बैलों को नचाया, जिससे पूरे माहौल में एक जीवंत और उत्सवपूर्ण ऊर्जा का संचार हुआ।
यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं
यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज के गहरे मूल्यों, जिसमें प्रकृति और पशुधन के प्रति सम्मान शामिल है, का प्रतीक है। सोहराय पर्व यह संदेश देता है कि आदिवासी जीवनशैली में मनुष्य, पशु और प्रकृति का तालमेल कितना अटूट है। पूरा गाँव इस उत्सव में एकजुट होकर शामिल हुआ और पारंपरिक उत्साह से सराबोर दिखा।