खंडपीठ ने राज्य सरकार से सवाल किया कि झारखंड में बिना लाइसेंस
खंडपीठ ने राज्य सरकार से सवाल किया कि झारखंड में बिना लाइसेंस ब्लड बैंक कैसे संचालित हो रहे हैं और ब्लड बैंकों के लाइसेंस का नवीनीकरण दो-दो साल से लंबित क्यों है। अदालत ने यह भी पूछा कि एचआईवी संक्रमण जांच के लिए न्यूक्लिक एसिड टेस्ट (NAT) मशीनें अब तक अस्पतालों में क्यों उपलब्ध नहीं कराई गईं। कोर्ट ने सरकार से चार नवंबर तक विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
राज्य के 82 ब्लड बैंकों में से 45 का लाइसेंस रिन्यू नहीं
राज्य के 82 ब्लड बैंकों में से 45 का लाइसेंस रिन्यू नहीं हुआ है और ये सिर्फ चालान पर संचालित हो रहे हैं। अदालत ने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया।
इस बीच, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार
इस बीच, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी सिविल सर्जनों के साथ बैठक की। उन्होंने निर्देश दिया कि अब प्रत्येक सरकारी ब्लड बैंक का प्रभारी एमडी पैथोलॉजिस्ट होगा। जहां एमडी पैथोलॉजिस्ट नहीं हैं, वहां शीघ्र नियुक्ति की जाएगी।
इधर, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने चाईबासा पहुंचकर मामले की जांच
इधर, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने चाईबासा पहुंचकर मामले की जांच की। उन्होंने बताया कि 2023 से 2025 के बीच ब्लड बैंक में 259 डोनरों ने रक्त दिया था, जिनमें से 44 की जांच में तीन एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं। शेष की जांच जारी है। मंत्री ने शनिवार तक सभी जिलों से ब्लड बैंक ऑडिट रिपोर्ट मांगी है और जल्द ही सभी जिलों में ब्लड सेपरेशन मशीन लगाने का निर्देश दिया है।