National News: केंद्र सरकार ने शनिवार को एक बड़ा निर्णय लेते हुए लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि को भारत का अगला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किया है. वह जनरल अनिल चौहान का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 मई को समाप्त हो रहा है. जनरल बिपिन रावत और जनरल अनिल चौहान के बाद राजा सुब्रमणि इस शीर्ष पद को संभालने वाले देश के तीसरे अधिकारी होंगे. अपनी नई भूमिका में वह सरकार के मुख्य सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य करेंगे और थल सेना, नौसेना व वायु सेना के बीच बेहतर तालमेल और एकीकरण (थिएटर कमान) सुनिश्चित करेंगे.
चार दशकों का शानदार सैन्य करियर और अनुभव
दिसंबर 1985 में गढ़वाल राइफल्स से अपने करियर की शुरुआत करने वाले राजा सुब्रमणि का सैन्य सफर लगभग चार दशकों का है. वह नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) और इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) के पूर्व छात्र रहे हैं. वर्तमान में वह राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले वह सेना के उप-प्रमुख (VCOAS) और लखनऊ स्थित केंद्रीय कमान के प्रमुख (GOC-in-C) जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. उनके पास कजाकिस्तान में डिफेंस अटैशे के रूप में काम करने का अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी है.
उग्रवाद विरोध से लेकर स्ट्राइक कोर तक की कमान
लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि ने देश के सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में ऑपरेशन्स का नेतृत्व किया है. उन्होंने असम में उग्रवाद विरोधी अभियान ऑपरेशन राइनो के दौरान 16 गढ़वाल राइफल्स की कमान संभाली थी. इसके अलावा, उन्होंने जम्मू-कश्मीर में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड और पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय सेना के प्रमुख स्ट्राइक कोर (2 कोर) का भी नेतृत्व किया. मिलिट्री इंटेलिजेंस के डिप्टी डायरेक्टर जनरल और डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में चीफ इंस्ट्रक्टर के रूप में उनकी भूमिका ने उन्हें रणनीतिक और शैक्षणिक स्तर पर एक परिपक्व सैन्य नेतृत्व प्रदान किया है.
उच्च शैक्षणिक योग्यता और सैन्य सम्मानों से सुसज्जित
राजा सुब्रमणि की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी बेहद प्रभावशाली है. उन्होंने ब्रिटेन के ज्वाइंट सर्विसेज कमांड स्टाफ कॉलेज से प्रशिक्षण लिया है और लंदन के किंग्स कॉलेज से मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री प्राप्त की है. उनकी विशिष्ट सेवाओं और वीरता के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM), सेना पदक (SM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से नवाजा जा चुका है. उनकी यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारतीय सेना आधुनिकीकरण और भविष्य की युद्ध चुनौतियों के लिए तैयार हो रही है.