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  • 2025-11-01

Jharkhand News: कैसे होगा झारखंड का उद्धार जब सरकार ही बन रही कर्जदार, राजकोष में 4000 करोड़ से भी कम नकदी, योजनाएं लटकी अधर में

Jharkhand News: झारखंड सरकार वित्तीय संकट की चपेट में है और कर्मचारियों के वेतन से लेकर विकास योजनाओं के खर्च तक में मुश्किल हो रही है. ढाई महीने से वेज एंड मीन एडवांस और ओवरड्राफ्ट के सहारे राज्य का राजकोष चल रहा है. फ्रीबीज ने सरकार का राजकोष पर जमकर प्रभाव डाला है. जनता से हेलमेट चेकिंग और तमाम टैक्स लगाने के बाद भी हेमंत सरकार घाटे में चल रही हैं. मुख्यमंत्री न ही सार्वजनिक रूप से विकास कार्यों की जानकारी देते हैं और न ही जनता के सवालों के जवाब.  

दिसंबर में 3000 करोड़ का कर्ज लेने की तैयारी में सरकार
आपको बता दें कि अगस्त के अंत में कोष निगेटिव बैलेंस में चला गया था. अब राज्य के पास लगभग 3000 से 4000 करोड़ रुपये की नकदी बची है. दूसरी तिमाही में सरकार ने बाजार से 3000 करोड़ का कर्ज लिया था. वित्तीय दबाव को देखते हुए दिसंबर तक 3000 करोड़ और कर्ज लेने पर विचार हो रहा है. खनिजों पर सेस से आय में थोड़ी बढ़ोतरी हुई लेकिन यह पर्याप्त नहीं. प्रथम अनुपूरक बजट में एक दर्जन विभागों की 11800 करोड़ की अतिरिक्त मांग खारिज कर दी गई. सरकार ने मात्र 3000 करोड़ आवंटित करने का फैसला लिया. संकट से निपटने के लिए सिंकिंग फंड का उपयोग भी विकल्प है. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने दावा किया कि कोई कल्याणकारी योजना बाधित नहीं होगी.

नहीं पूरा हो पाया राजस्व संग्रह का लक्ष्य
राजस्व संग्रह लक्ष्य का आधा भी नहीं हो पाया. वाणिज्य कर का लक्ष्य 26500 करोड़ था लेकिन प्राप्ति 11000 करोड़ यानी 42 प्रतिशत हुई. खनन सेस का लक्ष्य 6400 करोड़ प्राप्ति 2590 करोड़ 40 प्रतिशत. खनन रॉयल्टी का लक्ष्य 15500 करोड़ प्राप्ति 5200 करोड़ 34 प्रतिशत. उत्पाद शुल्क 3000 करोड़ का लक्ष्य 1400 करोड़ प्राप्ति 48 प्रतिशत. भू राजस्व 1800 करोड़ का लक्ष्य 850 करोड़ 46 प्रतिशत. निबंधन 1500 करोड़ का लक्ष्य 820 करोड़ 55 प्रतिशत. परिवहन 2400 करोड़ का लक्ष्य 850 करोड़ 40 प्रतिशत. वन राजस्व 1200 करोड़ का लक्ष्य 340 करोड़ 28 प्रतिशत. सिंचाई 380 करोड़ का लक्ष्य 220 करोड़ 57 प्रतिशत. अन्य 2376 करोड़ का लक्ष्य 580 करोड़ 24 प्रतिशत. कुल राजस्व लक्ष्य 125153 करोड़ प्राप्ति 48400 करोड़ मात्र 39 प्रतिशत.

अबुआ आवास और ग्रामीण सड़क निर्माण जैसे कई योजनाएं प्रभावित
सरकार का फोकस फ्रीबीज योजनाओं पर है. मंईयां सम्मान सर्वजन पेंशन और 200 यूनिट फ्री बिजली जैसी योजनाओं पर चालू वित्त वर्ष में 33250 करोड़ का प्रावधान है. मंईयां योजना पर सालाना 16000 करोड़ का अनुमान है. बजट में सोशल सेक्टर के लिए 62840 करोड़ सबसे ज्यादा आवंटित हैं. राज्य केंद्र सहायता अनुदान केंद्रीय कर हिस्सेदारी जीएसटी क्षतिपूर्ति केंद्रीय योजनाओं पर निर्भर है. समाज कल्याण शिक्षा नगर विकास स्वास्थ्य ग्रामीण विकास के खर्च बढ़ रहे हैं. बजट कमी से नए सड़क निर्माण, अबुआ आवास, ग्रामीण सड़क मरम्मत, पौधारोपण प्रभावित हो रहे हैं. सितंबर तक 34 प्रतिशत योजना राशि खर्च हुई. ग्रामीण कार्य आवास ने 50 प्रतिशत खर्च किया जबकि पेयजल पशुपालन खान भूतत्व पंचायती राज विभाग 10 प्रतिशत भी नहीं खर्च कर पाए. सितंबर 2025 तक कुल राजस्व प्राप्ति केवल 39 प्रतिशत रही.

विकास कार्यों का प्रभावित होना जनता के लिए नुकसान
झारखंड की वित्तीय स्थिति चिंताजनक है जहां खजाने में 4000 करोड़ से कम नकदी होने के बावजूद 3000 करोड़ कर्ज लेने की योजना सरकार की कमजोर राजस्व प्रबंधन को उजागर करती है. खनन सेस रॉयल्टी जैसे स्रोतों से लक्ष्य का आधा भी न मिलना आर्थिक नीति की विफलता दिखाता है. फ्रीबीज योजनाओं पर जोर कल्याणकारी लगता है लेकिन विकास कार्यों का प्रभावित होना जनता को लंबे समय में नुकसान पहुंचाएगा. सिंकिंग फंड का उपयोग अस्थायी राहत है लेकिन राजस्व बढ़ाने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं. कुल मिलाकर यह संकट राज्य की प्रगति को बाधित कर रहा है और सरकार को तत्काल सुधार पर ध्यान देना होगा.
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