झारखंड में औद्योगिक माहौल को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। राज्य की चार बड़ी टेक्सटाइल कंपनियाँ अपना उत्पादन केंद्र झारखंड से ओडिशा स्थानांतरित करने की तैयारी में हैं। उद्योगपतियों का कहना है कि झारखंड की टेक्सटाइल नीति व्यवहारिक स्तर पर प्रभावी नहीं है। उनका आरोप है कि यहाँ न तो आवश्यक सुविधाएँ मिल रही हैं और न ही सरकार की ओर से अपेक्षित सहयोग।
उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि झारखंड में संवाद की कमी है और नीतियों का लाभ ज़मीनी स्तर पर नहीं पहुँच रहा। इसके विपरीत ओडिशा में उद्योगों को बेहतर सुविधाएँ, संवाद की सुगमता और प्रोत्साहन दिया जा रहा है, यही कारण है कि कंपनियाँ वहाँ स्थानांतरण का निर्णय ले रही हैं।
राज्य में पहले से ही रोजगार और पलायन के मुद्दे चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में उद्योगों का दूसरे राज्यों में जाना झारखंड की आर्थिक स्थिति पर असर डाल सकता है। राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर भी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। सूचनाओं के अनुसार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के द्वारा यूरोप यात्रा के दौरान निवेश आकर्षित करने का दावा किया गया था, लेकिन उसका कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
वहीं राज्य में बढ़ते अपराध और असुरक्षा को भी उद्योगों के पलायन का कारण बताया जा रहा है। औद्योगिक संगठनों का कहना है कि प्रतिकूल व्यापारिक वातावरण और सरकारी स्तर पर सहयोग की कमी से निवेश प्रभावित हो रहा है, जिसका सीधा असर आम जनता और बेरोजगार युवाओं पर पड़ रहा है।