Ranchi News: बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर यात्रियों को छोड़ने या लेने पहुंचने वालों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. एक तरफ मिनट के हिसाब से पार्किंग शुल्क की सख्त वसूली हो रही है तो दूसरी तरफ आवारा कुत्तों का आतंक यात्रियों को डरा रहा है. एक नवंबर की शाम करीब पांच बजे एयरपोर्ट के मुख्य गेट के पास आधा दर्जन कुत्तों ने दौड़ लगाई और जोर-जोर से भौंकने लगे. दस मिनट तक चले इस हंगामे से लोग सहम गए लेकिन एयरपोर्ट स्टाफ और ट्रैफिक नियंत्रक मौन बने रहे.
एयरपोर्ट में घुसते ही हर गाड़ी को प्रवेश टिकट थमा दिया जाता है जिसमें समय सेकंड तक दर्ज होता है. यात्री को छोड़कर लौटते वक्त लंबी कतार में फंसना पड़ता है और हर अतिरिक्त मिनट पर जुर्माना लगता है. पार्किंग में गाड़ी खड़ी करने पर 80 रुपये चुकाने पड़ते हैं. एक यात्री ने बताया कि थोड़ी देर गाड़ी साइड में लगाओ तो ट्रैफिक वाले लॉक करने या उठा ले जाने की धमकी देते हैं लेकिन कुत्तों को भगाने की कोई फिक्र नहीं करते. माइक से बार बार चेतावनी दी जाती है कि गाड़ी हटाओ वरना लॉक होगी और जुर्माना देना पड़ेगा.
यात्रियों का कहना है कि शुल्क वसूली में तो पूरी मुस्तैदी दिखती है मगर सुरक्षा और सुविधा के नाम पर खानापूर्ति हो रही है. कुत्तों के झुंड ने बच्चों और बुजुर्गों को खासा परेशान किया लेकिन कोई जिम्मेदार सामने नहीं आया.
बिरसा मुंडा एयरपोर्ट की यह स्थिति यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर गंभीर सवाल खड़े करती है. आवारा कुत्तों का आतंक न केवल असुविधा पैदा कर रहा है बल्कि दुर्घटना का खतरा भी बढ़ा रहा है. एयरपोर्ट प्रबंधन की चुप्पी यह दर्शाती है कि प्राथमिकता केवल राजस्व संग्रह में है न कि यात्री सुरक्षा में. मिनट के हिसाब से पार्किंग शुल्क और लॉक करने की धमकी आम यात्रियों को तंग करती है जबकि लंबी कतारें और अव्यवस्था प्रबंधन की नाकामी को उजागर करती हैं. स्मार्ट सिटी का दावा करने वाले रांची में राजधानी का एयरपोर्ट इस हाल में है तो ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है. प्रबंधन को तत्काल कुत्तों को हटाने और पार्किंग व्यवस्था सुधारने के कदम उठाने चाहिए. यात्रियों की शिकायतों पर मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय करना जरूरी है वरना एयरपोर्ट की साख को नुकसान पहुंचेगा.