Jharkhand: 15 नवंबर 2000 को जब झारखंड एक नए राज्य के रूप में अस्तित्व में आया, तब शिक्षा की स्थिति बेहद सीमित थी। उच्च शिक्षा के नाम पर केवल तीन विश्वविद्यालय, रांची यूनिवर्सिटी, विनोबा भावे यूनिवर्सिटी (हजारीबाग) और सिदो कान्हू मुर्मू यूनिवर्सिटी (दुमका) ही थे। ग्रामीण इलाकों में स्कूलों की स्थिति भी दयनीय थी। लेकिन पिछले 25 वर्षों में झारखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, और आज यह राज्य देश के उभरते शैक्षणिक केंद्रों में शुमार हो चुका है।
राज्य में अब कुल 30 विश्वविद्यालय हैं, जिनमें 12 सरकारी और 18 निजी विश्वविद्यालय शामिल हैं। झारखंड में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) रांची जैसे प्रतिष्ठित केंद्रीय संस्थानों की स्थापना ने शिक्षा को नई ऊंचाई दी है।
कॉलेजों की संख्या भी 120 से बढ़कर 500 से अधिक हो गई
कॉलेजों की संख्या भी 120 से बढ़कर 500 से अधिक हो गई है। इनमें 62 सरकारी कॉलेज हैं, जबकि बाकी निजी, अनुदानित और स्ववित्तपोषित संस्थान हैं। राष्ट्रीय उच्च शिक्षा अभियान (RUSA) के तहत रांची कॉलेज को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय और वीमेंस कॉलेज, जमशेदपुर को विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है। वहीं छोटानागपुर लॉ कॉलेज समेत चार कॉलेजों को ऑटोनॉमस (स्वायत्त) का दर्जा मिला है, जिससे उन्हें शैक्षणिक नवाचार की स्वतंत्रता मिली है।
स्कूल शिक्षा के स्तर पर भी झारखंड ने बड़ी छलांग लगाई
स्कूल शिक्षा के स्तर पर भी झारखंड ने बड़ी छलांग लगाई है। राज्य में 23 हजार से बढ़कर अब 44 हजार स्कूल हो चुके हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सरकार ने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और मॉडल स्कूलों की स्थापना की है। ग्रामीण और जनजातीय इलाकों के बच्चों को भी अब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिल रहा है।
शिक्षक प्रशिक्षण और व्यावसायिक शिक्षा पर भी जोर दिया
शिक्षक प्रशिक्षण और व्यावसायिक शिक्षा पर भी जोर दिया गया है। राज्य में बीएड कॉलेजों की संख्या चार से बढ़कर 136 हो गई है। वहीं, तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी और झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है।
राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस मॉडल के जरिए गरीब और ग्रामीण
राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस मॉडल के जरिए गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चों को निजी स्कूलों जैसी आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। 25 साल की इस यात्रा में झारखंड ने यह साबित किया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मजबूत नीयत और दूरदर्शी नीतियों से शिक्षा की तस्वीर बदली जा सकती है।