स्थानीय भावना स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री या राज्यपाल
स्थानीय भावना स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री या राज्यपाल के हाथों उद्घाटन न होने पर मेले की प्रतिष्ठा में कमी आने की बात कही है। धार्मिक महत्व मिनी महाकुंभ कहे जाने वाला यह मेला बाबा हरिहरनाथ मंदिर और गजेंद्र मोक्ष की कथा से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण विशेष महत्व रखता है।
सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतज़ाम
मेले में हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा, ट्रैफिक और जनसुविधाओं के पुख्ता इंतज़ाम किए हैं, सुरक्षा व्यवस्था मेला परिसर में अस्थायी थाना, पुलिस पिकेट, कंट्रोल रूम, सीसीटीवी कैमरे, महिला सहायता केंद्र और पार्किंग क्षेत्र बनाए गए हैं। स्वास्थ्य सेवा आपातकालीन सेवा दल और स्वास्थ्य शिविर भी तैनात रहेंगे।
लोक परंपरा और आस्था का जीवंत केंद्र
सदियों पुराना यह मेला, जो कभी दुनिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता था, अब आध्यात्मिक पर्यटन, व्यापार और लोक-संस्कृति का केंद्र बन चुका है।सांस्कृतिक पहचान: देश-विदेश से आए श्रद्धालु, पर्यटक और व्यापारी एक साथ जुटकर लोक नृत्य, हस्तशिल्प, झूले और व्यापारिक प्रदर्शनियों के जरिए बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को फिर से जीवंत करते हैं। यह मेला आस्था और परंपरा के रंग में रंग गया है।