Bihar Breaking: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन की करारी हार के बाद आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार में हलचल तेज हो गई है. नतीजे आने के तुरंत बाद शुक्रवार को तेज प्रताप यादव ने अपने ही भाई तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए उन्हें फेलस्वी करार दिया था और पीएम नरेंद्र मोदी तथा एनडीए की खुलकर तारीफ की थी. इसके अगले ही दिन लालू परिवार में एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा. लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने शनिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर राजनीति छोड़ने और परिवार से नाता तोड़ने का एलान कर दिया है.
रोहिणी ने अपनी पोस्ट में कहा है कि उनसे ऐसा कदम उठाने के लिए संजय यादव और रमीज ने कहा था और वह सारी गलती अपने ऊपर ले रही हैं. रोहिणी ने एक्स पर लिखा कि वह राजनीति से अलग हो रही हैं और परिवार से भी दूरी बना रही हैं. इस बयान के सामने आने के बाद आरजेडी खेमे में चर्चा और तेज हो गई है.
रोहिणी आचार्य वही हैं जिन्होंने पांच दिसंबर 2022 को अपने पिता लालू प्रसाद यादव को किडनी दान दी थी. यह ट्रांसप्लांट सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में सफल हुआ था. वह लंबे समय से अपने परिवार के साथ सिंगापुर में रहती हैं लेकिन चुनाव प्रचार के लिए हाल ही में बिहार आई थीं. वह 2024 लोकसभा चुनाव भी लड़ी थीं लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.
इस बीच बिहार चुनाव के नतीजों में एनडीए ने 202 सीटें जीतकर बहुमत से आगे निकलने वाली बड़ी जीत दर्ज की है. वहीं महागठबंधन 35 सीटों पर सिमट गया. नतीजों के बाद से ही आरजेडी में नेतृत्व और चुनावी रणनीति को लेकर सवाल उठ रहे थे. ऐसे में रोहिणी का बयान पार्टी के अंदरूनी विवाद को और गहरा करने वाला माना जा रहा है. पार्टी या परिवार की ओर से अब तक इस मसले पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.
आरजेडी जिस तरह चुनाव में बुरी तरह हारकर सिमट गई है, उससे पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. तेज प्रताप और रोहिणी की प्रतिक्रियाएं संकेत देती हैं कि नेतृत्व को लेकर परिवार के भीतर मतभेद गहरे हो चुके हैं. चुनावी हार ने इन मतभेदों को और उजागर कर दिया है. रोहिणी का बयान न सिर्फ राजनीतिक रूप से बल्कि लालू परिवार की छवि और भविष्य की रणनीति पर भी असर डाल सकता है. आने वाले समय में इस विवाद का प्रभाव आरजेडी की एकता और संगठनात्मक ताकत पर साफ दिखाई दे सकता है.