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  • 2025-11-15

Samvad 2025: संवाद 2025 का भव्य आगाज़, झारखंड स्थापना दिवस और बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के दोहरे अवसर पर आदिवासियों का 12वां राष्ट्रीय समागम

Jamshedpur: धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर, टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा आयोजित आदिवासियों के राष्ट्रीय समागम संवाद का शनिवार को बिष्टुपुर के गोपाल मैदान में भव्य शुभारंभ हुआ। यह आयोजन इस वर्ष झारखंड के 25वें स्थापना दिवस के साथ मनाया जा रहा है, जिसने उत्सव के माहौल को और भी खास बना दिया है।

एमडी ने नगाड़ों की ताल पर किया नृत्य

संवाद 2025 का विधिवत उद्घाटन टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक (MD) सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) टीवी नरेंद्रन ने किया। उद्घाटन समारोह 450 वाद्य यंत्रों और नगाड़ों की गूंज के बीच हुआ, जिसमें सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग और गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।

आदिवासी समुदाय के पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मनमोहक धुन सुनकर टाटा स्टील के एमडी सह सीईओ टीवी नरेंद्रन खुद को रोक नहीं पाए और उन्होंने अपनी पत्नी रुचि नरेंद्रन के साथ उत्साहपूर्वक नृत्य किया। इस मौके पर उनके साथ टाटा स्टील के वीपी सीएस डीबी सुंदर रामम और टाटा स्टील फाउंडेशन के सीईओ सौरभ राय समेत कई विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे।

देशभर से 2,500 प्रतिभागी और 153 जनजातियां

टाटा स्टील फाउंडेशन के सीईओ सौरभ राय की देखरेख में आयोजित हो रहे इस 12वें संस्करण में आदिवासी समुदायों की अभूतपूर्व भागीदारी देखने को मिलेगी। इस वर्ष के संवाद में 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की 153 जनजातियों के लगभग 2,500 प्रतिभागी शामिल होंगे, जो भारत के लगभग 50% आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह आयोजन 19 नवंबर तक चलेगा।

यह राष्ट्रीय मंच 2014 में शुरू हुआ था और तब से अब तक 43,500 से अधिक लोग इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं, जिससे यह आदिवासी पहचान, कला और संस्कृति का एक अद्वितीय राष्ट्रीय मंच बन चुका है। कला, चिकित्सा और व्यंजन का अनूठा संगम गोपाल मैदान को आदिवासी संस्कृति के एक रंगीन मेले में बदल दिया गया है, जहां 51 स्टॉल लगाए गए हैं।

कला और हस्तशिल्प (51 स्टॉल): 18 राज्यों और 30 जनजातियों की पारंपरिक कलाएं, जैसे- घर सजावट के सामान, वस्त्र, आभूषण, पेंटिंग, और ब्लू पॉटरी का प्रदर्शन किया जा रहा है। पारंपरिक चिकित्सा (30 स्टॉल): 12 राज्यों की 24 जनजातियों के चिकित्सक अपनी पारंपरिक उपचार पद्धतियों की जानकारी देंगे। 

इस वर्ष विशेष रूप से लाइफस्टाइल डिजीज, कायरोप्रैक्टिक थेरेपी और बांझपन के पारंपरिक उपचार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। आतिथ्य - आदिवासी व्यंजन आतिथ्य - आदिवासी व्यंजन थीम के तहत, 12 जनजातियों के 19 होम-कुक विशेष पारंपरिक खाद्य पदार्थ प्रस्तुत करेंगे। खास बात यह है कि ये व्यंजन 15 से 19 नवंबर तक ज़ोमैटो पर भी उपलब्ध रहेंगे।

फिल्म स्क्रीनिंग और आदिवासी खेल

आयोजन में समुदाय के साथ पहल के तहत आदिवासी फिल्मों की विशेष स्क्रीनिंग भी होगी। अब तक प्राप्त 250 प्रविष्टियों में से 46 फिल्मों को मान्यता दी गई है। इसके अलावा, संवाद फेलोशिप के इस वर्ष 34 नए फेलो शामिल हुए हैं, जिन्होंने 70 से अधिक सांस्कृतिक प्रोजेक्ट पूरे किए हैं।

आदिवासी खेलों को बढ़ावा देने के लिए, हर दिन शाम 5 बजे से काटी और सेक्कोर के मैच भी खेले जाएंगे। इस भव्य समागम में आदिवासी समुदाय के लीडर देश परगना बैजू मुर्मू, दशमत हांसदा, पदमश्री चामी मुर्मू और कई अन्य पाहन ने हिस्सा लिया। पांच दिवसीय यह आयोजन आदिवासी संस्कृति की जीवंतता को प्रदर्शित करने वाला एक महाकुंभ है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।
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