Palamu News: पलामू में अफीम की खेती को रोकने के लिए इस बार पुलिस ने पूरी रणनीति के साथ सख्ती शुरू कर दी है. जागरूकता अभियान चलाने के साथ साथ अवैध खेती के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज कर दी गई है. वर्ष 2024 से 2025 के बीच जिले में अफीम की खेती पर रिकॉर्ड कार्रवाई हुई है और इसी अनुभव के आधार पर पुलिस ने इस साल पहले से अधिक चौकसी बढ़ाई है.
पुलिस ने इस बार सिर्फ खेतों पर ही नहीं बल्कि खेती में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की सप्लाई चेन पर भी ध्यान केंद्रित किया है. पानी के पंप, पाइप, नाली, छिड़काव मशीन और अन्य कृषि उपकरण खरीदने वालों की सूची दुकानदारों से मांगी जा रही है. ग्रामीण इलाकों में खेत की जुताई में लगे ट्रैक्टरों की भी जानकारी ली जा रही है. पांकी, तरहसी, मनातू, नावाजयपुर, पाटन, पांडु, नावाबाजार और हरिहरगंज सहित कई क्षेत्रों में दुकानों और सप्लायर पर पुलिस की नजर है.
हाल में पुलिस को जानकारी मिली है कि कुछ लोगों ने पानी के इलाके से चतरा की ओर पानी के पंप खरीदे हैं. चूंकि अफीम की फसल के लिए पटवन जरूरी होता है और यह पंप उसी में उपयोग किए जाते हैं, इसलिए पंप खरीदने वालों के पूरे विवरण को दुकानदारों से सुरक्षित रखने को कहा गया है.
अफीम की खेती का सत्यापन जारी, जिले में हाई अलर्ट
पुलिस लगातार गांव गांव जाकर खेतों का सत्यापन कर रही है. पिछले वर्षों में जहां जहां अवैध खेती मिली थी, उन स्थानों का भी पुनरीक्षण किया गया है. अब तक पुलिस और प्रशासन को किसी बड़े पैमाने पर खेती करने के ठोस सबूत नहीं मिले हैं. जहां पहले खेती होती थी वहां भी स्थितियां सामान्य मिली हैं. अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत से अफीम की खेती शुरू होने की आशंका रहती है, इसी वजह से पूरे जिले में हाई अलर्ट घोषित किया गया है.
पलामू एसपी रीष्मा रमेशन ने बताया कि अवैध अफीम खेती को रोकने के लिए लगातार अभियान चल रहा है. पुलिस हर सूचना का भौतिक सत्यापन कर रही है और ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है. कई गांवों में बैठक कर लोगों को खेती से दूर रहने की सलाह दी गई है. मनातू क्षेत्र में एक जगह खेती की कोशिश की गई थी जिसे तुरंत नष्ट कर दिया गया. एसपी ने बताया कि अब तक किसी भी इलाके में संगठित रूप से खेती की जानकारी नहीं मिली है.
अफीम की खेती रोकने की दिशा में इस बार पुलिस की तैयारी पहले की तुलना में कहीं अधिक केंद्रित और तकनीकी दिखाई दे रही है. सप्लाई चेन की निगरानी, दुकानदारों की सूची की जांच और ट्रैक्टर की मूवमेंट पर नजर रखना दिखाता है कि पुलिस अब सिर्फ खेतों पर निर्भर नहीं है बल्कि खेती से जुड़े पूरे नेटवर्क को समझकर कार्रवाई कर रही है. हालांकि असली चुनौती यह होगी कि जैसे ही मौसम अनुकूल होगा, अवैध खेती करने वाले समूह छुपे रूप में काम शुरू कर सकते हैं. इसके लिए जमीनी स्तर पर सतत निगरानी और ग्रामीणों के सहयोग की सबसे अधिक जरूरत होगी. पुलिस की यह तैयारी अगर लगातार बनी रही तो इस बार अवैध अफीम खेती को रोकने में बड़ा फर्क देखने को मिल सकता है.