National News: प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ा एक्शन लेते हुए अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. मंगलवार देर रात गिरफ्तारी के बाद उन्हें दिल्ली की साकेत कोर्ट में पेश किया गया जहां अदालत ने तेरह दिन की ईडी कस्टडी दे दी. कोर्ट ने कहा कि जांच अभी शुरूआती दौर में है और सिद्दीकी से गहन पूछताछ जरूरी है ताकि सारे राज खुल सकें.
ईडी ने कोर्ट को बताया कि जावेद सिद्दीकी अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और उससे जुड़े विश्वविद्यालय के सारे वित्तीय फैसले खुद लेते थे. ट्रस्ट के पैसे को परिवार की निजी कंपनियों में डायवर्ट किया गया. निर्माण के ठेके हो या कैटरिंग का काम सब उनकी पत्नी और बच्चों की कंपनियों को ही दिए जाते थे. मंगलवार को दिल्ली और फरीदाबाद में 25 ठिकानों पर छापे के दौरान 48 लाख से ज्यादा नकदी कई डिजिटल डिवाइस और शेल कंपनियों से जुड़े कागजात बरामद हुए थे.
सबसे गंभीर आरोप यह है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने एनएएसी और यूजीसी की 12 बी मान्यता होने का झूठा दावा करके छात्रों और अभिभावकों को ठगा. यूजीसी ने साफ कर दिया है कि विश्वविद्यालय के पास सिर्फ 2 एफ की मान्यता है और 12 बी के लिए कभी आवेदन तक नहीं किया गया. फिर भी ब्रोशर और वेबसाइट पर झूठी मान्यता दिखाकर मोटी फीस वसूली जा रही थी.
ईडी का कहना है कि ट्रस्ट के फंड में बड़े पैमाने पर हेरफेर हुआ है. 90 के दशक से जिस रफ्तार से अल फलाह ग्रुप का विस्तार हुआ वह उसकी घोषित आय से कहीं ज्यादा है. जांच एजेंसी को शक है कि कहीं न कहीं अवैध पैसा इसमें लगा है जिसे लेयरिंग के जरिए साफ दिखाया गया.
अल फलाह मामला देश में प्राइवेट यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट के जरिए होने वाली वित्तीय अनियमितताओं की एक और मिसाल है. फर्जी मान्यता का खेल छात्रों के भविष्य से सीधे जुड़ा होता है और इससे हजारों परिवार प्रभावित होते हैं. ईडी की यह कार्रवाई साफ संदेश देती है कि अब चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर पैसा बनाने वालों की खैर नहीं. जावेद सिद्दीकी की तेरह दिन की रिमांड में कई और बड़े नाम खुल सकते हैं क्योंकि आम तौर पर ऐसे मामलों में सिर्फ एक शख्स ही सारा खेल नहीं चलाता. आने वाले दिन हरियाणा और दिल्ली के शिक्षा कारोबार में हड़कंप मचाने वाले हैं.