Jharkhand News: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स की हालत पर हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्ती दिखाई है. मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि गवर्निंग बॉडी की 62वीं बैठक में जो फैसले लिए गए थे उन्हें दो महीने में लागू करने का आदेश दिया गया था लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ. अदालत ने रिम्स प्रशासन को कागजी हलफनामे दाखिल करने वाला बता दिया.
याचिकाकर्ता ज्योति शर्मा के वकील ने कहा कि रिम्स में सिर्फ कागज पर काम होता है जमीनी हकीकत वही बदहाल है. अधिवक्ता दीपक दुबे ने मांग की कि पारदर्शी जांच के लिए विशेष टीम भेजी जाए. इस पर हाईकोर्ट ने झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण यानी झालसा(JHALSA) के सचिव को तुरंत एक जांच टीम गठित करने का निर्देश दे दिया. यह टीम रिम्स में पेयजल की व्यवस्था, दवाओं की उपलब्धता, मशीनों की हालत, स्वच्छता, डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस, बाहरी दवा खरीद और चिकित्सा उपकरणों की कार्यशीलता सबकी पड़ताल करेगी. रिपोर्ट दस दिन में अदालत को सौंपनी होगी.
सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि दो महीने की समयसीमा अभी पूरी नहीं हुई है और काम चल रहा है. एमआरआई मशीन जल्द खरीद ली जाएगी. अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होगी.
रिम्स की बदहाली पर हाईकोर्ट का यह सख्त रुख बताता है कि कागजी जवाबों से अब काम नहीं चलेगा. झालसा की टीम का दौरा इसलिए अहम है क्योंकि वह स्वतंत्र और निष्पक्ष रिपोर्ट देगी. अगर रिपोर्ट में फिर वही पुरानी कहानी निकली तो रिम्स निदेशक से लेकर स्वास्थ्य सचिव तक की कुर्सी हिल सकती है. गरीब मरीजों का यह आखिरी सहारा है और सालों से यही हाल है. हाईकोर्ट ने अब सीधे हस्तक्षेप कर जो दबाव बनाया है उससे सरकार को मजबूरन सुधार करने पड़ेंगे. 10 दिन बाद आने वाली रिपोर्ट तय करेगी कि रिम्स में बदलाव की शुरुआत होती है या फिर सिर्फ नई तारीख मिलती है. मरीजों के लिए यह उम्मीद की किरण है.