Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने खनन एवं भूविज्ञान विभाग में कर्मचारियों की कमी और पदोन्नति में लापरवाही पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया. चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान की बेंच ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उप निदेशक खनन के सभी आठों स्वीकृत पद खाली पड़े हैं लेकिन सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया. कोर्ट ने इसे अस्वीकार्य बताया.
बेंच ने खनन विभाग के सचिव को एक हफ्ते में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया. कोर्ट ने नाराजगी जताई कि मामला इतना गंभीर होने के बावजूद शपथ पत्र निचले स्तर के सहायक खनन अधिकारी ने दाखिल किया. कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि भविष्य में हाईकोर्ट में हलफनामा सिर्फ उच्च अधिकारियों से ही दाखिल हो. अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी.
खनन विभाग में उप निदेशक जैसे अहम पदों का पूरी तरह खाली होना चौंकाने वाला है क्योंकि झारखंड का राजस्व का बड़ा हिस्सा खनन से आता है. आठों पद खाली रहने से अवैध खनन पर निगरानी कमजोर पड़ती है और माफिया का हौसला बढ़ता है. हाईकोर्ट का सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा मांगना साफ संदेश है कि अब कागजी जवाब नहीं चलेगा. सरकार अगर एक हफ्ते में ठोस प्लान नहीं दिखाती तो कोर्ट और सख्ती कर सकता है. यह मामला अवैध खनन रोकने की दिशा में बड़ा टर्निंग पॉइंट बन सकता है. आम जनता को उम्मीद है कि इस बार सिर्फ हलफनामा नहीं बल्कि जमीन पर भर्ती और पदोन्नति होगी.