Jharkhand News: राज्य सरकार ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने और मरीजों को एक ही केंद्र पर सभी पद्धतियों की दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अबुआ दवाखाना योजना की शुरुआत कर दी है. झारखंड की कुल आबादी का लगभग 76 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है और यहां आयुष चिकित्सा पद्धति की गहरी उपस्थिति के बावजूद एलोपैथी और आयुष दवाओं तक पहुंच में कठिनाइयां बनी रहती हैं. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एकीकृत औषधि केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया है जहां एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्धा पद्धति की दवाएं एक ही स्थान पर मुफ्त में उपलब्ध होंगी.
राज्य में उपलब्ध स्वास्थ्य ढांचे के बावजूद अलग अलग केंद्रों से दवा लेने में ग्रामीण मरीजों को परेशानी होती थी. वर्तमान में झारखंड में 3958 स्वास्थ्य उपकेंद्र, 3973 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 330 पीएचसी, 188 सीएचसी और 24 सदर अस्पताल संचालित हैं. अब सरकार ने तय किया है कि सभी जिलों में 745 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर अबुआ दवाखाना चलाया जाएगा. इन केंद्रों को मॉडल फॉर्मेसी आउटलेट की तर्ज पर बनाया जाएगा. यहां ग्राहक सेवा काउंटर, श्रेणीवार रैक, भंडारण अलमारियां, रेफ्रिजरेटर और कम्प्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली उपलब्ध होगी.
दवा आपूर्ति और निगरानी के लिए जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है जो दवा सूची, खरीद और समीक्षा करेगी. प्रखंड स्तर पर बीडीओ की अध्यक्षता वाली समिति भवन प्रबंधन और निरीक्षण का कार्य देखेगी. दवाओं की आपूर्ति एलोपैथी और आयुष दोनों की आवश्यक दवा सूची के अनुसार होगी. एलोपैथी दवाओं के लिए सीएचओ की ओर से सीएचसी प्रभारी को और आयुष दवाओं के लिए जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी को इंडेंट भेजा जाएगा. मासिक रूप से प्रखंड समिति और त्रैमासिक रूप से जिला समिति निगरानी कार्य पूरा करेगी.
अबुआ दवाखाना का संचालन आयुष्मान आरोग्य मंदिर में कार्यरत योग प्रशिक्षक करेंगे जबकि पर्यवेक्षण संबंधित आयुष चिकित्सक और सीएचओ की जिम्मेदारी होगी. तकनीकी संचालन के लिए आयुष निदेशालय में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट का गठन किया गया है जिसमें आयुष उप निदेशक, आईटी मैनेजर और एक फार्मासिस्ट शामिल रहेंगे. राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में दवा उपलब्धता और चिकित्सा सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी.
स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि अबुआ दवाखाना योजना से पहली बार ग्रामीण आबादी को सभी पद्धतियों की मुफ्त दवाएं एक ही केंद्र पर मिलेंगी. उन्होंने कहा कि लक्ष्य है कि ग्रामीण क्षेत्र का हर व्यक्ति सही उपचार से वंचित न रहे और उसे बिना भेदभाव दवाएं मिल सकें. सरकार के अनुसार यह योजना तकनीक, पारदर्शिता और जनसहभागिता के सहारे स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगी.
अबुआ दवाखाना योजना ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है. ग्रामीण क्षेत्रों में दवा उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती रही है. अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों की दवाओं को एकीकृत कर सरकार ने व्यवस्था को सरल बनाने की कोशिश की है. यदि दवा आपूर्ति नियमित रही और निगरानी तंत्र प्रभावी तरीके से काम करता रहा तो यह मॉडल ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत कर सकता है. साथ ही मरीजों की निर्भरता निजी दवा दुकानों या विदेशी चिकित्सा सलाह पर कम होने की उम्मीद है.