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  • 2025-11-26

Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने कहा CCA की अवधि बढ़ाने में एडवाइजरी बोर्ड की दोबारा मंजूरी जरूरी नहीं

Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि झारखंड कंट्रोल ऑफ क्राइम्स एक्ट (CCA) के तहत की गई प्रिवेंटिव डिटेंशन में शुरुआती मंजूरी के बाद हिरासत अवधि बढ़ाने के लिए एडवाइजरी बोर्ड की दोबारा राय की आवश्यकता नहीं होती है. कोर्ट ने कहा कि एक बार एडवाइजरी बोर्ड डिटेंशन को उचित मान ले और राज्य सरकार कन्फर्मेटरी ऑर्डर जारी कर दे तो इसके बाद होने वाले एक्सटेंशन कानूनी रूप से वैध माने जाएंगे.

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की डिवीजन बेंच ने यह टिप्पणी लातेहार के उपेंद्र यादव उर्फ भूपेंद्र यादव की रिट याचिका खारिज करते हुए दर्ज की. याचिकाकर्ता को एक्ट की धारा 12(2) के तहत असामाजिक तत्व मानकर प्रिवेंटिव डिटेंशन में रखा गया था और उसकी हिरासत को तीन-तीन महीने के अंतराल पर बढ़ाया गया था.

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि वह असामाजिक तत्व की परिभाषा में नहीं आता है और बढ़ाई गई अवधि अवैध है, क्योंकि नए एक्सटेंशन के लिए एडवाइजरी बोर्ड की मंजूरी नहीं ली गई. कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ हत्या की कोशिश, जबरन वसूली, मारपीट और आर्म्स एक्ट सहित कई गंभीर मामले वर्षों से दर्ज हैं, जो आदतन अपराधी की कानूनी परिभाषा को पूरा करते हैं.

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एडवाइजरी बोर्ड की भूमिका शुरुआती मूल्यांकन तक सीमित है. जब बोर्ड यह राय दे देता है कि हिरासत के लिए पर्याप्त आधार है और राज्य सरकार इसे स्वीकार करते हुए कन्फर्मेटरी ऑर्डर जारी कर देती है तो इसके बाद बोर्ड से पुनः अनुमति लेने की बाध्यता समाप्त हो जाती है. एक्ट में एक्सटेंशन के लिए दोबारा समीक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है, इसलिए राज्य सरकार अपनी विवेकाधीन शक्ति के तहत हिरासत अवधि बढ़ा सकती है.

हाईकोर्ट का यह निर्णय प्रिवेंटिव डिटेंशन मामलों में प्रशासनिक अधिकारों को मजबूत करता है. आदेश का सीधा असर उन मामलों पर पड़ेगा जहां गंभीर आपराधिक इतिहास वाले व्यक्तियों को CCA के तहत हिरासत में रखा जाता है. यह स्पष्ट किया गया है कि एक्सटेंशन का आधार अपराधी की प्रवृत्ति और सार्वजनिक व्यवस्था पर उसके संभावित असर पर निर्भर करेगा, न कि हर बार बोर्ड की पुनः हस्तक्षेप की प्रक्रिया पर.
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