यह राहत 26 नवंबर को हुई सुनवाई के बाद मिली है। मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को निर्धारित की गई है, और तब तक खनन विभाग को टाटा स्टील के खिलाफ कोई भी पीड़क कार्रवाई करने से रोक दिया गया है।
नोटिस का कारण, डिस्पैच में कमी
खनन विभाग ने यह डिमांड नोटिस टाटा स्टील के सुकिंदा क्रोमाइट ब्लॉक से खनिज भेजने में कमी करने के आरोप में जारी किया था। डिमांड नोटिस जारी: 3 जुलाई को ओडिशा के जाजपुर स्थित उपखान निदेशक के कार्यालय से।
कंपनी ने खान विकास और उत्पादन समझौता के चौथे साल जुलाई 2023 से जुलाई 2024 तक के दौरान सुकिंदा क्रोमाइट ब्लॉक से उतना खनिज डिस्पैच नहीं किया जितना निर्धारित था। इसे खनिज रियायत नियम 2016 के नियम 12ए का उल्लंघन माना गया। इस नियम का उद्देश्य कंपनियों को खनिज संसाधनों का भंडारण करने के बजाय उनका उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करना है।
खनन विभाग इस उल्लंघन का हवाला देते हुए कंपनी द्वारा जमा की गई परफॉरमेंस सिक्यूरिटी को जब्त करना चाहता था। यह राशि पट्टे की शर्तों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए एक वित्तीय गारंटी के रूप में जमा की जाती है।
हाईकोर्ट में चुनौती
खनन विभाग के इस नोटिस के खिलाफ टाटा स्टील ने 8 अगस्त को ओडिशा हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। कंपनी ने अपनी याचिका में इस मांग को गलत करार देते हुए नोटिस को रद्द करने की मांग की। हाईकोर्ट ने याचिका पर त्वरित कार्रवाई करते हुए तत्काल प्रभाव से नोटिस पर रोक लगा दी थी। इसके बाद 21 सितंबर और फिर 26 सितंबर को हुई सुनवाई में भी कंपनी को मिली यह अंतरिम राहत बरकरार रखी गई है।