Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2025-11-30

Jharkhand News: झारखंड में आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए नई SOP जारी, नसबंदी और टीकाकरण पर फोकस

Jharkhand News: झारखंड सरकार ने राज्य में बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए नई एसओपी जारी की है. शहरी निकायों को कम से कम 70 प्रतिशत आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का लक्ष्य दिया गया है. सरकार का मानना है कि इससे सार्वजनिक सुरक्षा और रेबीज के मामलों में कमी आएगी.

नई एसओपी के तहत पालतू कुत्तों का निबंधन अनिवार्य किया गया है. हर पालतू कुत्ते को शहरी निकाय या पंचायती राज संस्था में दर्ज कराना होगा. रांची के आंकड़े बताते हैं कि खतरा कितना बढ़ा है. वर्ष 2023 में सदर अस्पताल में 4,715 लोगों ने एंटी रेबीज इंजेक्शन लिया था. वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 7,503 हो गई.

एसओपी के मुताबिक आवारा कुत्तों की पकड़, नसबंदी और टीकाकरण की प्रक्रिया तेज की जाएगी. कार्रवाई के बाद कुत्तों को कॉलर से चिन्हित किया जाएगा. इनके लिए विशेष फीडिंग जोन भी तय किए जाएंगे. स्वास्थ्य विभाग को एंटी रेबीज वैक्सीन और रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. पालतू कुत्ते के काटने पर इलाज और कानूनी खर्च की जिम्मेदारी उसके मालिक की होगी.

अगले 30 दिनों में तीन चरणों में कार्रवाई होगी. इसमें नोडल समन्वय समिति का गठन, एबीसी इंफ्रास्ट्रक्चर का ऑडिट और इसके बाद सघन अभियान की शुरुआत शामिल है.

जिलों में आवारा कुत्तों की संख्या
  • गिरिडीह: 36,764
  • हजारीबाग: 24,451
  • रांची: 23,885
  • पलामू: 23,727
  • देवघर: 23,582
  • चतरा: 20,860
  • धनबाद: 19,764
  • बोकारो: 16,358
  • गुमला: 15,472
  • गढ़वा: 11,009
  • रामगढ़: 10,754
  • जामताड़ा: 13,436
  • लोहरदगा: 6,177
  • लातेहार: 8,177
  • कोडरमा: 8,768

गिरिडीह जिले में सबसे अधिक 36,764 आवारा कुत्ते दर्ज किए गए हैं. रांची में 23,885 कुत्तों की संख्या है और हजारीबाग में 24,451 कुत्ते पाए गए हैं.

झारखंड सरकार की नई एसओपी आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी और रेबीज के मामलों को रोकने की दिशा में कारगर कदम है. बड़े शहरों में बढ़ते हमलों ने प्रशासन के लिए चुनौती खड़ी की थी. नसबंदी और टीकाकरण पर जोर से भविष्य में इनकी संख्या नियंत्रित हो सकती है. पालतू कुत्तों के मालिकों पर जिम्मेदारी तय करने से भी अव्यवस्था कम होगी. हालांकि योजना की सफलता शहरी निकायों की क्षमता, संसाधनों और अभियान की निरंतरता पर निर्भर करेगी. अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया तो सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों में सुधार देखा जा सकेगा.
WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !