National News: RBI की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद देश की वित्तीय बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है. केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की है. इससे आने वाले महीनों में लोन सस्ता हो सकता है और EMI पर सीधा असर पड़ेगा. महंगाई में लगातार गिरावट और आर्थिक संकेतकों में सुधार को देखते हुए यह कदम उठाया गया है.
तीन दिन चली इस बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि इस वर्ष कुल 1 फीसदी की कटौती की जा चुकी है. पहले रेपो रेट को 6.5 फीसदी से घटाकर 5.5 फीसदी किया गया था. अब इसमें और कमी की गई है और यह 5.25 फीसदी पर आ गया है. पिछली दो बैठकों में नीतिगत दरें स्थिर रखी गई थीं.
महंगाई को लेकर रिजर्व बैंक का अनुमान है कि वित्तीय वर्ष 2025 से 2026 के बीच यह करीब 2.6 फीसदी तक रह सकती है. यह फरवरी में जारी 4.2 फीसदी के अनुमान से कम है. आरबीआई का मानना है कि 2026 की अंतिम तिमाही में महंगाई लगभग 4 फीसदी के आसपास रहेगी. उधर GDP ग्रोथ में तेजी दर्ज की गई है. वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि 8.2 फीसदी पर रही जो बीते डेढ़ साल का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जा रहा है.
रेपो रेट में कटौती का सीधा असर बैंकिंग सिस्टम पर पड़ता है. दर घटने से बैंकों को सस्ते में फंड मिलता है और होम लोन ऑटो लोन तथा बिजनेस लोन की EMI में संभावित कमी आ सकती है. रियल एस्टेट सेक्टर ने इस कदम को सकारात्मक बताते हुए कहा है कि इससे घर खरीदने की मांग बढ़ेगी. विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में लिक्विडिटी बढ़ने से उपभोक्ता खर्च में सुधार होगा. हालांकि छोटे और सूक्ष्म उद्यमों का मत है कि बैंकों की मार्जिन नीति में बदलाव आने पर ही वास्तविक राहत मिल सकती है.
नीति घोषणा से पहले शेयर बाजार में ज्यादा उतारचढ़ाव नहीं देखा गया. आईटी रियल्टी और ऑटो इंडेक्स में हल्की तेजी रही जबकि मीडिया और हेल्थकेयर इंडेक्स दबाव में दिखे.
रेपो रेट में कटौती ऐसे समय में हुई है जब महंगाई नीचे की ओर जा रही है और ग्रोथ मजबूत संकेत दे रही है. इससे स्पष्ट होता है कि आरबीआई मांग को प्रोत्साहित करना चाहता है ताकि आर्थिक गति बनी रहे. लोन सस्ते होने से कंज्यूमर और रियल एस्टेट दोनों सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा. हालांकि बैंकिंग सिस्टम का व्यवहार और ब्याज दरों में बदलाव यह तय करेगा कि आम लोगों को राहत कितनी तेज और कितनी व्यापक मिलेगी.