पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी युवाओं को रेलवे कैंटीन में स्थायी नौकरी दिलाने का दावा करता था. इसके बदले वह प्रति युवक 10 हजार से 50 हजार तक की रकम रजिस्ट्रेशन और ट्रेनिंग शुल्क के नाम पर लेता था. कई युवाओं ने अपनी बचत लगा दी तो कई ने कर्ज लेकर पैसे दिए. आरोपी ने सभी को तीन महीने के प्रशिक्षण के लिए लगाया जिससे युवाओं को विश्वास हो गया कि उनकी नौकरी पक्की है.
प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद न सैलरी मिली और न ही नियुक्ति पत्र
प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद भी न तो सैलरी मिली और न ही कोई नियुक्ति पत्र. जब लगातार टालमटोल होती रही और बहाने बढ़ने लगे तो युवाओं ने ठगी की आशंका जताई. आखिरकार पीड़ित युवक नगर थाना पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई. मामला सामने आते ही पुलिस हरकत में आई.
डीएसपी कुमार गौरव के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई जिसने कई जगह छापेमारी की. टीम ने आरोपी राकेश रोशन को गिरफ्तार कर लिया. वह बसंतराय थाना क्षेत्र के महेशपुर गांव का रहने वाला है. पूछताछ में उसने ठगी की बात कबूल की. पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि इस पूरे काम में कुछ और लोग भी शामिल हो सकते हैं और उनकी पहचान की प्रक्रिया जारी है.
पैसा कहां खर्च किया गया, पुलिस कर रही जांच
एसडीपीओ अशोक प्रियदर्शी ने बताया कि आरोपी ने करीब 200 युवाओं से मोटी रकम ली है और अब तक की जांच में लगभग 1 करोड़ की ठगी की पुष्टि हुई है. पुलिस यह जांच कर रही है कि यह गिरोह कितने समय से सक्रिय था और वसूला गया पैसा कहां खर्च किया गया.
पूछताछ में आरोपी ने यह भी बताया कि उस पर काफी कर्ज हो चुका था और उसने अपना घर भी बेच दिया था. कर्ज चुकाने के लिए वह इस तरह की धोखाधड़ी में उतर गया. पुलिस के अनुसार वह इस ठगी के नेटवर्क को बिहार में भी फैलाने की तैयारी में था.
युवाओं ने की है कड़ी सजा देने की मांग
घटना के बाद पीड़ित युवक और उनके परिवार बेहद नाराज हैं. उनका कहना है कि बेरोजगारी के दौर में इस तरह युवाओं का शोषण करने वालों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए. आम जनता का मानना है कि नौकरी के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से बचने के लिए युवाओं को अधिक जागरूक होने की जरूरत है.
बेरोजगार युवाओं की मजबूरी को ठगों के गिरोह बना लेते हैं हथियार
इस मामले ने एक बार फिर बताया है कि बेरोजगार युवाओं की मजबूरी को ठगों के गिरोह कैसे हथियार बना लेते हैं. फर्जी नियुक्ति के नाम पर चल रहे रैकेट सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचाते बल्कि युवाओं के भरोसे और भविष्य पर भी भारी चोट करते हैं. पुलिस की सक्रियता से भले ही आरोपी पकड़ा गया हो लेकिन जरूरत इस बात की है कि ऐसी ठगी के खिलाफ जागरूकता लगातार बढ़ाई जाए और युवाओं को हर तरह के नौकरी प्रस्ताव की जांच परख कर ही कदम बढ़ाना चाहिए.